अपनी बुलंदियों से आसमान छू लिया तुमने, पर कह गई हमें अलविदा- ‘कल्पना चावला’

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हरियाणा के करनाल में जन्म लिया और पहुंच गई अंतरिक्ष।

कल्पना चावला ने अपने सपनों के बारे में मां को बताया तो उन्होंने कहा उड़ान भरो। बस फिर क्या था, अंतरिक्ष में जाने वाली पहली महिला कहलाकर प्रदेश का नाम रोशन किया।

आज भी देश की जांबाज बेटी कहलाती है कल्पना, जो एक छोटे से शहर से निकलकर नासा तक पहुंची और ऐसा काम किया कि दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई।

कल्पना स्कूल में कभी टॉपर नहीं रही, लेकिन अंतरिक्ष तक पहुंची। अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला भी कहलाई। ये अपने आप में एक बड़ा मुकाम था।

अपने सभी भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। स्कूल में उनका फेवरेट सब्जेक्ट साइंस था और ड्रॉइंग में वो हमेशा स्काय, स्टार्स और प्लेन्स ड्रॉ किया करती थीं।

kapana chawla

बचपन में बोला करती थीं कि उन्हें फ्लाइट इंजीनियर बनना है क्योंकि उन्हें लगता था कि इंजीनियर ही फ्लाइट डिजाइन करते हैं। वे भी फ्लाइट डिजाइन करने के बारे में सोचा करती थीं। कल्पना जिस सोसायटी से थी, वहां लड़कियों को ज्यादा पढ़ाया-लिखाया नहीं जाता था, लेकिन कल्पना पढ़ना चाहती थी। हायर स्टडी करना और एक मुकाम पर पहुंचना उनकी जिद थी।

कल्पना ने चंडीगढ़ के एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया। कॉलेज की पढ़ाई के बाद उन्हें जॉब का ऑफर भी मिल गया लेकिन कल्पना का सपना अंतरिक्ष में जाने का था इसलिए उन्होंने जॉब ठुकरा दी।

1986 में सेकंड मास्टर्स डिग्री पूरी हुई। 1988 में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की। उनके पास कमर्शियल पायलेट का लाइसेंस भी था। वे सर्टिफाइड फ्लाइट इंस्ट्रक्टर और क्रिएटिव एस्ट्रोनॉट थी।

कल्पना ने सन् 1993 में नासा में पहली बार अप्लाई किया था, तब उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था। पर कल्पना ने हार नहीं मानी। 1995 में नासा ने अंतरिक्ष यात्रा के लिए कल्पना का चयन किया।

kalpana chawla

19 नवंबर 1997 वो दिन था, जब उनका बचपन का सपना पूरा होने जा रहा था। इस दिन उनका पहला स्पेस मिशन शुरु हुआ। STS 87 कोलंबिया शटल में उनके साथ 6 एस्ट्रोनॉट्स और थे। उन्होंने पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की। 1 करोड़ 4 लाख हजार किमी की यात्रा की। स्पेस पर 373 से ज्यादा घंटे बिताए। लौटने के बाद नासा स्पेश मेडल, नासा डिस्टिंगविश्ड सर्विस मेडल जैसे अवॉर्ड से भी नवाजा गया था।

16 जनवरी 2003 को कोलंबिया फ्लाइट STS 107 से दूसरे मिशन की शुरुआत हुई। 1 फरवरी 2003 को स्पेस शटल अर्थ के एटमॉसफियर में एंटर करने के दौरान तकनीकी दिक्कत आने की वजह से नष्ट हो गया।

इसमें कल्पना सहित सभी मेंबर्स मारे गए और देश की इस बेटी ने सबको अलविदा कह दिया। सबकी आंखे नम करके कल्पना बस अपनी याद और जांबाजी के किस्से छोड़ चली।

Blast

कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थी (बाद में उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी)।
राकेश शर्मा के बाद वे दूसरी ऐसी भारतीय थीं, जो अंतरिक्ष तक पहुंची।

कल्पना ने दो मिशन में 30 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट स्पेस पर बिताए।

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