एमएसपी से खुश नहीं किसान, अब कैसे होगा समाधान ?

खेत-खलिहान हरियाणा

किसानों को इस बार के बजट में उनकी फसलों के समर्थन मूल्य डेढ़ गुना देने का फैसला लिया गया है. बावजूद इस घोषणा के भी किसानों को राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है. किसानों की माने तो उनकी लागत मूल्य और समर्थन मूल्य में बहुत अंतर आ रहा है जिस वजह से किसानों को 50 फीसद लाभ देने का बात गले नहीं उतर रही है।

दो तरह के किसान, कैसे होगा समाधान ?
प्रदेश में अगर बात की जाए तो दो तरह के किसान हैं। एक किसान वो हैं जिनकी खुद की जमीन है और दूसरे किसान वो हैं जो ठेके पर जमीन लेकर खेती करते हैं। ऐसे में किसानों की समस्या भी अलग-अलग है। जिनकी खुद की जमीन है वो तो 50 फीसद से खुश हो सकते हैं. लेकिन जिनकी खुद की जमीन नहीं है वो 50 फीसद लागत मूल्य से भी खुश नहीं हैं। ऐसे में सरकार के सामने जिनकी खुद की जमीन नहीं है वो किसान भी चिंता का विषय है।

लागत ज्यादा, मुनाफा आधा
किसान नेता प्रीत सिंह ने बताया कि किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है चाहे वो जमीन को ठेके पर लेने की हो, चाहे वो बीज, खाद खरीदने की या फिर बुआई-कटाई-कढाई की । यहां पर किसान मार खाता है. किसान फसल बेचकर सोचता है कि मैंने बचत कर ली. लेकिन असल में जब वो घर आकर पूरा हिसाब जोड़ता है तो उसके हाथ में कुछ भी बचत नहीं होती. बल्कि किसान कर्जवान ही होता जाता है।

नरमा-कपास की पैदावार वाले किसान परेशान
इस साल लंबे रेशे वाली कपास का एसएसपी 4050 रुपये क्विंटल है जबकि हाई ब्रीड वैरायटी की कपास के दाम 3950 रुपये क्विंटल है, लेकिन किसानों का कहना है कि सीसीआई अच्छी क्वालिटी की कपास भी 3950 रुपये प्रति क्विंटल की भाव पर खरीद रही है। सीसीआई के अफसरों के मुताबिक मिक्स क्वालिटी की कपास के दाम तय करना उनके लिए मुश्किल है। वहीं नरमा-कपास की फसल पर सबसे ज्यादा लागत है, नरमा और कपास की लागत मूल्य और समर्थन मूल्य में किसान को कुछ भी बचत नहीं होती।

क्या है न्यूनतम समर्थन मूल्य ?
किसानों को उनकी उपज का ठीक मूल्य दिलाने और बाजार में कीमतों को गिरने से रोकने के लिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है। कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों पर सरकार फसल के बोने के पहले कुछ कृषि उत्पादों पर समर्थन मूल्य की घोषणा करती है।

कितनी फसलों पर मिलता है समर्थन मूल्य ?
सरकार 26 कृषि उत्पादों पर समर्थन मूल्य घोषित करती है। इनमें सात अनाज, पांच दलहन, आठ तिलहन के अलावा जटा वाले और छिले नारियल, कपास, जूट और तंबाकू शामिल है। इसके अलावा गन्ने की कीमतें गन्ना( नियंत्रण) आदेश 1966 के तय होती है।

कैसे तय होती है फसलों की कीमत ?
70 के मध्य दशक तक दो तरह के मूल्य घोषित किया जाता था। पहला न्यूनतम समर्थन मूल्य और दूसरा खरीद मूल्य। पहले का उद्देश्य यह था कि बाजार में कीमतोंको एक स्तर से नीचे ना आने दिया जाए। सामान्यत खरीद मूल्य बाजार मूल्य से नीचे और न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा होता था।

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