कभी पीजी के खाने से परेशान रहा करती थी, एमबीए की, एचआर बनी और अब लगा दी खाने की रेहड़ी

रोजगार हरियाणा

लोग एमबीए करके उच्च शिक्षा प्राप्त करते है ताकि एक अच्छी नौकरी लग सके। लेकिन एक ऐसी लड़की जिसने रिलायंस में एचआर की अपनी पक्की जॉब छोड़ खाने की रेहड़ी लगा डाली।

जी हां राधिका की रेहड़ी पर आपको राजमा- चावल, कड़ी चावल, दाल-चावल, रोटी- सब्जी के साथ- साथ वो सभी पकवान खाने को मिलेंगे जो आपके घर पर बनते हैं।

आपको राधिका के हाथ के खाने का स्वाद वैसा ही लगेगा, जैसा मां के हाथ से बने खाने का होता है। शायद इसी वजह से रेहड़ी का नाम ‘मां का प्यार’ रखा गया है।

मोहाली के इंडस्ट्रियल एरिया फेज- 8 में वो रोज 1 से 3 बजे तक अपनी रेहड़ी लगाती है।

राधिका ने बताया कि वो अंबाला की रहने वाली है और एमबीए की पढ़ाई के लिए वो चंडीगढ़ आई थी। पढ़ाई के दौरान उसे पीजी में रहना पड़ा लेकिन वहां खाने को लेकर बहुत सी तकलीफ उठानी पड़ी थी। न तो स्वाद होता और न ही पका होता और ऊपर से काफी पैसे भी देने पड़ते थे। ऐसे में राधिका अपनी मां के हाथ का खाना बहुत याद करती थी।

बस फिर क्या था राधिका को लगा कि मेरी तरह बहुत से लोग खाने के लिए परेशान होते है क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे मैं लोगो की कुछ मदद कर सकूं। खाने के लिए परेशान लोगो को घर का खाना खिला कर उनकी कुछ तकलीफ दूर करु।

लेकिन चुनौती बहुत मुश्किल थी क्योंकि एक पढ़ी- लिखी लड़की खाने की रेहड़ी लगाए अजीब लगता है। पर राधिका ने किसी की भी परवाह किए बिना ये कदम उठाने का सोचा और अपने घर वालों को जब राधिका ने खाने की रेहड़ी लगाने के बारे में बताया तो सब हैरान रह गए।

परिवार वालो ने राधिका को खूब समझाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी, क्योंकि वो तो ठान कर बैठी थी कि समाज के लिए जरुर कुछ अच्छा करेंगी।

आखिरकार राधिका को घर से इजाजत मिल ही गई। बस फिर क्या था बिना किसी झिझक के एमबीए राधिका ने खाने की रेहड़ी लगाई।
फोटोग्राफी और पेंटिंग का शौक रखने वाली राधिका ने बताया कि इस ठेले को उसने खुद से सजाया है। अब वो चंडीगढ़ आईटी पार्क में भी ऐसा ठेला खोलने पर विचार कर रही है।

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