कोर्ट ने डीसी, एसपी व एसएचओ को लगाई फटकार

हरियाणा विशेष

नाबालिग से रेप के एक मामले में पुलिस की जांच में देरी करने पर नूंह की अडिशनल सेशन जज शशि चौहान की कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को फटकार लगाई है। तल्ख़ टिप्पणी कर कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष कोर्ट को एक मूक दर्शक न समझे। कोर्ट कोई टेपरिकॉर्डर नहीं है, जहां गवाहियां रिकॉर्ड की जाएं, लेकिन सचाई को अनदेखा कर दिया जाए। कोर्ट ने डीसी, एसपी व एसएचओ को भी नोटिस दिया है।

बता दें कि पिछले साल दर्ज हुए नाबालिग से रेप के एक मामले में पुलिस एफएसएल रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी। इस वजह से ट्रायल आगे नहीं बढ़ रहा था। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को फटकार लगाते हुए नूंह के डीसी, एसपी व फिरोजपुर झिरका थाना एसएचओ के अलावा थाने के मुंशी को मामले पर कारण बताओ नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया।

कोर्ट के आदेश के बावजूद कोर्ट में न तो डीसी और न ही एसपी हाजिर हुए। उनकी ओर से डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी और डीएसपी हेडक्वॉर्टर ऐफिडेविट के साथ कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने कहा कि जिले की पुलिस का कार्यकारी मुखिया एसपी होता है तथा रूल 1.21 के मुताबिक पुलिस को जूडिशल अफसर के आदेश का पालन करना अनिवार्य होता है। अगर इस प्रकार के मामलों में कोताही होती है तो उसके जिम्मेदार डीसी या एसपी होते हैं।

अडिशनल सेशन जज शशि चौहान ने डीसी को निर्देश देते हुए कहा कि वह डिफॉल्टिंग अमाउंट अदा करने के लिए एक प्रक्रिया तय करें। कोर्ट में पेश होने वाले पुलिस कर्मचारियों व अन्य कर्मचारियों को शिष्टाचार में रहने की भी नसीहत दें।

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