‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’ सिपाही सीताराम ने साबित कर दिया की ये कहावत बिलकुल सही है

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क्या एक बार नाकामयाबी से इंसान को निराश होकर बैठ जाना चाहिए?

जिन्दगी में बहुत से उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। लेकिन वो कहते है न कि जिसने मुश्किलों का सामना कर लिया, उसने जिन्दगी में जीना सिख लिया।

स्कूल के दिनों में अपने पिता के साथ मजदूरी करने वाले सीताराम आज यूं सबके दिलो पर राज करेंगे किसी ने सोचा न था।

एक समय ऐसा था कि इंस्पेक्शन के दौरान राइफल दिखाने को कहा गया तो सीताराम ठीक से राइफल को एक्शन में नहीं ले सके। इस वजह सें डीओ ने उन्हें जोरदार फटकार लगाई।
सीताराम बहुत दुखी हो गए लेकिन ठान लिया कि आज से अलर्ट ही रहूंगा।

बार-बार फेल होने के बाद और फटकार लगने के बाद भी सीताराम ने अपने जज्बे को टूटने नहीं दिया और शायद यही वजह थी कि 926 करोड़ की देश की एक बड़ी डकैती को नाकाम करने में उन्होंने सफलता हासिल की।

कैसे बने हीरो –

उस दिन एक्सिस बैंक के बाहर रात ढाई बजे एक इनोवा में से 13 बदमाश ढकैती की नियत से आए। सी स्कीम स्थित बैंक के बाहरी हिस्से में गेट पर निजी सुरक्षा गार्ड प्रमोद तैनात थे।

सभी बदमाशो ने प्रमोद पर हमला कर दिया और उसके हाथ-पैर बांधने लगे। हलचल सुनकर बैंक तिजोरी की सुरक्षा में तैनात सीताराम समझ गया और तुरंत फायर कर दिया। इस बीच बदमाश डर कर भाग निकले।

सीताराम ने कहा वो पल काफी डरावना था पर मैंने हिम्मत नहीं छोड़ी।

सीताराम एक छोटे से परिवार से संबंध रखते है। उनके माता-पिता पढ़े लिखे नहीं है इसलिए उनके लिए भी पढ़ना काफी मुश्किल रहा है।

पढ़ने का शौक था इसलिए पिता के साथ मजदूरी करते हुए कॉपी-किताबों का इंतजाम किया। बीएड करके टीचर बनना चाहता थे, लेकिन कॉन्स्टेबल भर्ती में चुन लिया गया।

मूल रुप से सीताराम राजस्थान के सीकर में पूनियाणा गांव से संबंध रखते हैं।

सीनीयर सेकंडरी तक की पढ़ाई दांतारामढ़ से की तो कॉलेज रेनवाल से। बारहवीं में टॉपर रहे हैं।

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