दावे और हकीकतः देशभर में बेरोजगारी की मार, हर महीने बड़ी फौज हो रही तैयार

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देश में अच्छे दिनों का वादा किया था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने। देश के युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी घोषणा पत्र में। हर हाथ को काम देने का दावा किया था चुनाव से पहले। लेकिन अब इन वादों और दावों से सरकार भी मुंह फेरती नजर आ रही है।

हाल ये है कि अब बेरोजगारों को रोजगार के नाम पर पकौड़ों की रेहड़ी लगाने की सलाह दी जा रही है। बाद में उनके बच्चों को उधोगपति बनने का सपना भी दिखाया जा रहा है। लेकिन इस पकौड़ा राजनीति में पिस भोली-भाली जनता ही रही है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक हर महीने बेरोजगारों की एक बड़ी फौज तैयार हो रही है। बेरोजगारी घटने की बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। हर रोज देश में करीब 30 हजार युवा नौकरी के लिए तैयार हो रहे हैं लेकिन नौकरी महज 450 लोगों को ही मिल पा रही है। जिस वजह से हर महीने करीब 10 लाख युवा नौकरी की चाह में भटक रहे हैं ऐसे में यह आकंड़ा बढ़ता जा रहा है।

भारत में खासकर युवा तबके में बढ़ती बेरोजगारी गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। केंद्र सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों में कहा गया है कि देश की आबादी के लगभग 11 फीसदी यानि 12 करोड़ लोगों को नौकरियों की तलाश है।

इन आंकड़ों से साफ है कि पढ़े-लिखे युवा छोटी-मोटी नौकरियां करने की बजाय बेहतर मौके की तलाश करते रहते हैं। बेरोजगार युवाओं में लगभग आधे लोग ऐसे हैं जो साल में छह महीने या उससे कम कोई छोटा-मोटा काम करते हैं। लेकिन उनको स्थायी नौकरी की तलाश है।

कुल बेरोजगारों में ऐसे लोगों की तादाद लगभग 34 फीसदी यानि 1.19 करोड़ है. वर्ष 2001 से 2011 के दौरान 15 से 24 वर्ष के युवाओं की आबादी में दोगुनी से ज्यादा वृद्धि हुई है, लेकिन दूसरी ओर उनमें बेरोजगारी की दर 17.6 फीसदी से बढ़ कर 20 फीसदी तक पहुंच गई है।

वर्ष 2001 में जहां 3.35 करोड़ युवा बेरोजगार थे वहीं 2011 में यह तादाद 4.69 करोड़ पहुंच गई. वर्ष 2001 में युवाओं की आबादी एक करोड़ थी जो 2011 में 2.32 करोड़ हो गई यानि इसमें दोगुना से ज्यादा वृद्धि दर्ज हुई. इसके मुकाबले इस दौरान देश में कुल आबादी में 17.71 फीसदी वृद्धि दर्ज हुई. इन आंकड़ों से साफ है कि युवाओं की तादाद जहां तेजी से बढ़ रही है वहीं उनके लिए उस अनुपात में नौकरियां नहीं बढ़ रही हैं।

2014 के मेनीफेस्टो में रोजगार बढ़ाना बीजेपी के मुख्य एजेंडे में शामिल था, रोजगार बढ़ाने लिए बड़े-बड़े वादे भी किए गए थे लेकिन रोजगार को बढ़ाना तो दूर की बात है, बड़े महकमे में जो पद सालों से खाली है वो भी अब तक नहीं भरे जा पाए हैं।

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