पकौड़ा बेचने वालो की कहानी, 4-5 पैसे से शुरू कर करोड़ो तक पहुँचा व्यापार

रोजगार हरियाणा

प्रधानमंत्री के पकौड़ा वाले ब्यान के बाद, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के पकौड़ा बनाने वाला उद्योपति बनेगा वाले ब्यान आने तक, पकौड़ राष्ट्रीय व्यंजन घोषित हो चुका है। सड़क से लेकर संसद तक इस मुद्दे को बेरोजगारी का मजाक के तौर पर देखा जा रहा है।

लेकिन आज हम आपको ऐसे ही एक परिवार के बारे बताते है जो महज पकौड़े बेचकर ही करोड़पति बन गया।
सन् 1947 में पाकिस्तान से खाली हाथ बहादुरगढ़ पहुंचे मानसिंह दुआ ने चौक पर अंगीठी लगाई और दो, तीन व पांच पैसे में चार से आठ पकौड़े बेचने लगे। धीरे-धीरे पकौड़े का स्वाद और सुगंध पड़ोसी राज्यों तक जा पहुंची।

अब उनके बेटे के बाद पोते भी पकौड़ों का ही कारोबार कर रहे हैं। पकौड़ों ने उनके पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी है। इसी तरह पंडित मुखराम शर्मा का परिवार भी पीढ़ी दर पीढ़ी पकौड़े बेच रहा है। देश में पकौड़ों पर गर्म हुई सियासत पर बहादुरगढ़ के कारोबारी कहते हैं कि पकौड़ों ने हमें समाज में सिर उठाकर जीने लायक जिंदगी दी है।

पैसों से रुपयों में जा पहुँची पकौड़ो की कीमत आज 350 रुपए किलो है, जो 5 फीसदी जीएसटी के साथ बिक रहे हैं। जटवाड़े के पंडित मुखराम शर्मा ने 1950 में लाल चौक पर ही पकौड़े की दुकान सजाई। आज मुखराम के पोते संजय व प्रवीण बिजनेस संभाले हुए हैं।

तो वहीं महेंद्र पकौड़े वाले के नाम से पहचाने जाने वाले सुरेश को बीकॉम के बाद नौकरी नहीं मिली। उन्होंने 1972 में शहर के मेन मार्केट में 10 रुपए उधार लेकर पकौड़ों की रेहड़ी लगा ली तो पहले ही दिन 26 रुपए के पकौड़े बिक गए। जब वह हर रोज 100 से 200 तक कमा लेते थे, तब पूसा एग्रीकल्चर सिसर्च सेंटर से गवर्नमेंट जॉब का लेटर आया था तो वे नौकरी करने नहीं गए। उन्होंने इसी पकौड़े की कमाई से घर तैयार किया, दुकान ली, और अब एक बेटा मैनेजर है और दूसरा प्रोफेसर है।

वहीं हिसार जिले के नागोरी गेट पर पकौड़े वाले मदन एक क्विंटल से ज्यादा के पकौड़े बेच देते हैं। 1998 में सिटी के नेता होशियारी मल बंसल की बेटी की शादी थी। इसमें ओपी जिंदल पहुंचे थे और बैंगन के पकौड़े खाने की इच्छा जताई। तभी स्पेशल बैंगन के पकौड़े तैयार करवाए गए।

तो बहादुरगढ़ के चौक पर पकौड़े खाने के शौकीनों में पूर्व मुख्यमंत्री देवीलाल, बंसीलाल और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ-साथ फिल्म एक्टर राजेश खन्ना, भीम का रोल करने वाले प्रवीण कुमार भी शामिल हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा तो यहां सड़क पर ही खड़े होकर पकौड़ों का आनंद लेते थे। पकौड़ों में यहां 12 तरह के पकौड़ों की डिमांड है। यहां 2 दुकानों से शुरू हुआ सिलसिला अब 18 तक पहुंच गया है, जिनसे 100 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। इनका पकौड़ा कारोबार का सालाना टर्नओवर 3 करोड़ रुपए से अधिक है।

यह उन लोगों की कहानी है जिनकी ज़िंदगी पकौड़े की वजह से बदल गई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *