फतेहाबाद के ऐतिहासिक गांव कुनाल में हड़प्पाकालीन सभ्यता की खोज में खुदाई प्रक्रिया आरम्भ

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फतेहाबाद के ऐतिहासिक गांव कुनाल में राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली तथा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग हरियाणा की देखरेख में खुदाई की प्रक्रिया आरम्भ हो गई है।

राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. बीआर मनी तथा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की उपनिदेशक डॉ बुनानी भट्टाचार्य ने कुदाल चलाकर विधिवत रूप से खुदाई प्रक्रिया की शुरुआत की।

अभी तक कुनाल में पांच चरण की खुदाई हो चुकी है। पिछले वर्ष हरियाणा सरकार, राष्ट्रीय संग्रहालय व भारतीय पुरातत्व समिति के बीच हुए समझौते के बाद कुनाल में खुदाई का यह छठा चरण होगा। खुदाई का कार्य दो माह तक चलेगा।

कुनाल की खुदाई के दौरान अभी तक प्री हड़प्पाकालीन सभ्यता के अवशेष मिले हैं, जो 6 हजार साल बीसीई यानी लगभग 8 हजार वर्ष प्राचीन हैं। हड़प्पाकालीन सभ्यता करीब 3500 साल पुरानी है।

राष्ट्रीय संग्रहालय और पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को उम्मीद है कि इस बार कुनाल में सात हजार वर्ष बीसीई या इससे भी अधिक की प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिल सकते हैं।

पूर्व में खुदाई के दौरान आभूषण, मणके, हड्डियों के मोती मिले थे। यहां पर 1985 में भी खुदाई का काम शुरू हुआ था। उस दौरान यहां सोने और चांदी के आभूषण मिले थे। यहां पर आभूषण पिघालने की भट्टी भी मिली थी, जिससे यह लग रहा है कि लोग आभूषण ढालने का काम किसी भट्टी द्वारा करते थे।

खुदाई के दौरान यहां पर गोलाकार घर भी मिले हैं, जो हड़प्पाकालीन संस्कृति से भी पूर्व की संस्कृति के प्रमाण सिद्ध हो रहे हैं। हड़प्पाकालीन सभ्यता के लोग घरों को चौरस बनाते थे। कहीं पर भी ईंट और पत्थरों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। कुनाल में खुदाई का उद्देश्य इस स्थल की प्राचीन भौतिक संस्कृति को उजागर करना है।

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