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फलों की खेती से लबालब हुआ हरियाणा

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समय बदलता है और हर चीज में परिवर्तन आना लाज़मी है, चाहे वो शिक्षा को लेकर हो, समाज की प्रथा हो य फिर रहन- सहन का तरीका।

हमारे हरियाणा में भी खेती को लेकर कुछ ऐसा ही बदलाव देखने को मिला है।

जहां अधिकतर किसान परंपरागत खेती के तौर-तरीकों को बदलते दिखे, तो वहीं खेती को बिजनेस के लिहाज से भी किसान अब आंकने लगे हैं।

किसानों की सोच खेती के साथ-साथ फलों की खेती की तरफ भी कायम हुई है। यही कारण है कि धीरे-धीरे फलों की खेती का रकबा प्रदेश में बढ़ता जा रहा है।

हालांकि राज्य और केंद्र सरकार ने भी किसानों को संपन्न बनाने के लिए जहां कृषि के तौर-तरीकों में परिवर्तन लाने की मुहिम छेड़ी हुई है, वहीं विभागीय अधिकारी भी गांव-गांव जाकर किसानों को फसलों के विविधिकरण के साथ-साथ फलों की खेती के लिए भी प्रोत्साहित करते रहते हैं।

पहले किसान फार्मूला खेती के साथ-साथ देखा-देखी को ही अपना आधार मानता था। पड़ोस के खेत में अगर अमुक फसल है, तो वह भी इसी फसल की बिजाई करता।

कृषि विभाग ने इस परम्परा को खत्म करने के लिए जहां पूर्व में फसलों के विविधिकरण की योजना लागू की तो वहीं वर्ष 2005 में केंद्र की ओर से राष्ट्रीय बागवानी मिशन शुरू हुआ।

इसका परिणाम ये रहा कि किसान बागवानी की ओर मुड़ते चले गए। कारण साफ था कि बागवानी के लिए विभाग द्वारा किसानों को सबसिडी भी पर्याप्त मिल रही थी। इसी का ही असर रहा कि किसान फार्मूला और देखा-देखी से बाहर निकलकर बाग की ओर आकर्षित हो गया।

पूरे राज्य में बाग लहराने लगे और यह रोजगार का भी एक अच्छा साधन बन गया है।
आज प्रदेश फलों की खेती से खूब फलाहार होता जा रहा है।

2015-16 में बढ़ती हुई फलों की खेती-

आम का उत्पादन 9259 हेक्टेयर
अमरूद 11211 हेक्टेयर
सीट्रस 19652
बेर 4136
अंगूर 38 हेक्टेयर
चीकू 1632
आंवला 2226 और लीची की 201 हेक्टेयर में खेती की गई।

आम, चीकू और लीची की खेती ज्यादातर अम्बाला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र पंचकूला में हुई।
हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी में सीट्रस की खेती ज्यादा हुई।

फलों की खेती में देखिए कितनी बढ़ोतरी हुई है –

1966-67 में 7,865 हैक्टेयर में बागों की खेती थी ।
1991-92 में बढ़कर 13,930 हेक्टेयर हो गया।
2005 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन शुरू होने से बागों का एरिया 22,297 हेक्टेयर हो गया।
2011-12 में 47,036 हैक्टेयर
2015-16 में 60,915 हेक्टेयर हो गया है।

सिरसा में इस मिशन के शुरू होने से पूर्व महज 2,400 हेक्टेयर एरिया था जो अब बढ़कर 10 हजार के करीब हो गया है।

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