फागण की होळी.. भाभियां आळे थाणे मै

कला-संस्कृति होली के रंग

फागण की होळी तो आ देख ल्यो हरियाणे मै

टोरा कसुत्ता पावेगा भाभियाँ आळे थाणे मै

 

गोबर माट्टी का नाम बड़ा है हरियाणे की होळी मै

नाळी-नाळे भरे पड़े सै देवर-भाभी न लेटाणे मै

 

नई भावज जब घर आवे खेलण आळे आ जा सै

बिन बताए भांग मिला दें भाभी आळे खाणे मै

 

बटेऊ की भी काण नी बिटोड़े सा थे दे सै

बिन आए भी डान्स करा दें ताऊ आळे गाणे मै

 

के पुछोगे भाई थाम हरियाणे की होळी का

गोबर का गुलाल बणा क माहिर है लगाणे मै

 

कोय दिन भी छोड़ै कोनी फागण के पखवाड़े का

सै मजा भाभी-साली न जोहड़ बीच नवहाणे मै

 

कीमे कसर फेर छोड़े कोनी भाभी म्हारे गाम की

एम्ए बीए कर राखी जब कोरडे तै लाल बणाणे मै

 

खेल्दै-2 पहुँच ले सै  जब खेताँ आळी गार मै

आवभगत भाभी की होवै उसकी बहण पटाणे मै

 

मज़ा ‘पूनम’ जब आवै सै पुरे गाम की गलियों का

कोरडा ठाए लोग मिलजै लुगाइयां आळे बाणे मै

 

                        – पूनम पांचाल, सफीदों

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