तेज बहादुर की बर्खास्तगी के मामले में कोर्ट की टिप्पणी, कोई रोटी मांगे तो क्या रोटी छीन लेंगे

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महेंद्रगढ़ के तेज बहादुर यादव ने सोशल मिडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें बीएसएफ जवानों को खराब खाना परोसे जाने की शिकायत की गई थी। इसी वजह से उन्हें नौकरी से बरखास्त कर दिया गया।

यादव ने अब पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पीबी बजंथरी ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह ब्लंडर है। कोई रोटी मांगे तो क्या उसकी रोटी छीन लेंगे। हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल को नोटिस जारी कर 28 मई तक जवाब मांगा है।

सीनियर अधिकारियों पर भोजन की राशि के नाम पर घपला करने का आरोप लगाया था जिससे काफी विवाद हुआ था। यादव 2032 में रिटायर होने वाले थे, लेकिन विवाद के बाद वीआरएस की अर्जी दे दी। अर्जी स्वीकार कर ली गई थी और उन्हें 31 जनवरी 2017 को रिटायर करने का फैसला लिया गया।

याची के वकील एसपी यादव ने कोर्ट में कहा कि रिटायरमेंट के समय से ठीक आधे घंटे पहले तेज बहादुर को एक बैरक में बंदी बना लिया गया और जबरन वीआरएस कैंसिल करने के फैसले पर साइन करा लिए गए। तेज बहादुर ने उसके खिलाफ बटालियन के कमांडेंट को पत्र लिखा और कहा कि उसे बिना नोटिस दिए वीआरएस कैंसिल करने का फैसला कैसे कर लिया गया।

उसे एक एंबुलेस में डालकर ले जाया गया जहां परिवार से कोई बातचीत नहीं करने दी गई। जब परिवार के सदस्यों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की तब इसके तेज बहादुर को फोन पर परिवार से बात करने दी गई।

23 फरवरी को उसे चार्जशीट थमा दी गई थी इसके बाद 19 अप्रैल को दि समरी सिक्योरिटी फोर्स कोर्ट ने उसे नौकरी से बर्खास्त करने का फैसला सुना दिया।
तेज बहादुर ने इस फैसले के खिलाफ बीएसएफ के डीजी के पास अपील की लेकिन डीजी ने अपील डिसमिस कर दी। अब हाईकोर्ट में याचिका दायर कर समरी सिक्योरिटी फोर्स कोर्ट और डीजी के फैसले को खारिज कर बहाली और सभी लाभ दिए जाने की मांग की गई है।

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