रोहतक के बलहम्बा गांव के विनोद ने पेश किया दिव्यांगों के लिए एक ऐसा उदाहरण कि देखने वाले दांतों तले उंगलिया दबा लें

कला-संस्कृति

दुनियां में बहुत से दिव्यांग हैं, जिन्में से कुछ ऐसे हैं जो अपनी जिंदगी को भगवान भरोसे छोड़ देते हैं। वे अपने आप को कोई काम करने में समर्थ नहीं समझते हैं।

ऐसे लोगों के लिए रोहतक जिले के बलहम्बा गांव का रहने वाला विनोद एक उदहारण पेश कर रहा है। जिसने एक सड़क हादसे में अपना हाथ गवां दिया था। लेकिन उसने हार नहीं मानी और अपने पैर को ही अपनी अजिविका का साधन बना लिया।

आज स्थिती यह है कि बैंजो बजाकर विनोद अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है। आपको बता दें बैंजो एक ऐसा यंत्र है, जिसे अच्छे-अच्छे लोग काफी रियाज के बाद भी नहीं बजा पाते। इस यंत्र के तारों पर ब्लेड और उंगलियों से बटन दबा कर सुरीला संगीत निकाला जाता है।

लेकिन जब एक व्यक्ति अपने पैरों में ब्लेड पकड़कर सुरीली धून निकाले तो देखने वाले दांतों तले उंगलिया दबा लेते हैं। विनोद के बैंजो बजाने से निकलने वाली धुन लोगों को मंत्र मुग्ध कर देती है।

विनोद ने बताया कि शुरूआत के समय उसे बहुत दिक्कत होती थी। जब पैर में ब्लेड पकड़ता तो उंगली कट जाती। लेकिन उसने हार नहीं मानी और अपना रियाज करता रहा। उसने कहा ये सब उसकी मेहनत और मां सरस्वती की कृपा है।

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