शिरोमणि अकाली दल का अपनी पुरानी सहयोगी इंडियन नेशनल लोकदल और बीजेपी से अलग जाकर हरियाणा चुनाव लड़ने का फैसला

राजनीति

हरियाणा में इनैलो और केंद्र में भाजपा की सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने प्रदेश में होने वाले अगामी विधानसभा चुनावों में अकेले ही लड़ने का फैसला किया है। अकाली ने अपने दशकों पुराने गठबंधन सहयोगी इंडियन नेशनल लोकदल के साथ पिछले साल ही संबंधों को तोड़ दिया था और अकेले ही चुनाव में जाने का फैसला किया था। तो वहीं केंद्र में भाजपा के खिलाफ भी खड़े होने का फैसला किया है। हरियाणा में 2014 के विधानसभा चुनावों में एसएडी ने आईएनएलडी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था जिसके बाद भाजपा में काफी बैचेनीं बढ़ी थी। बता दें कि चौटाला परिवार के बादल परिवार से राजनीतिक से ज्यादा पारिवारिक संबंध हैं।

शिरोमणि अकाली दल ने हरियाणा में अपने पर्यवेक्षक नियुक्त करने शुरू कर दिये है, जो 2019 के चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को जुटाने का काम करेंगे। वरिष्ठ अकाली नेता और सांसद बलविंदर सिंह भंवर ने हरियाणा में पार्टी प्रभारी की नियुक्ति के लिए बैठक की अध्यक्षता की जिसमें पार्टी ने हरियाणा इकाई के शरदजीत सिंह साहोटा को फिर से पार्टी प्रमुख नियुक्त किया है। शिरोमणि अकाली दल ने हरियाणा में 90 विधानसभा सीटों में से 55 में चुनाव लडने का निर्णय लिया है। बता दें कि हरियाणा में 35 विधानसभा सीटों में सिख मतदाताओं की बड़ी उपस्थिति है। तो वहीं एसएडी का इनैलो से अलग हो जाने का एक मुख्य कारण 2016 में सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर की जमीन को उनके मूल मालिकों को वापिस करना माना जा रहा है। जिस पर आईएनएलडी ने आपत्ति जताई थी। एसवाईएल हरियाणा-पंजाब के लिए हमेशा से ही मुख्य मुद्दा रहा है।

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