सरकार अपने सरकारी खजाने से भरती है विधायकों और मंत्रियों का टैक्स

बिजनेस हरियाणा

पंजाब सरकार द्वारा अपने विधायकों और मंत्रियों के इनकम टैक्स का भुगतान नहीं करने के फैसले का असर हरियाणा पर भी पड़ेगा। हरियाणा सरकार हर साल विधायकों और मंत्रियों को मिलने वाले वेतन और भत्तों पर करीब 4 करोड़ रुपये के इनकम टैक्स का भुगतान सरकारी खजाने से करती है। पंजाब में यह राशि करीब 11 करोड़ रुपये सलाना है।

हरियाणा के विधायकों ने “द हरियाणा लेजिसलेटिव असेंबली” (फेसीलेटिज टू मेंबर) एक्ट 1979 पास कर 38 साल पहले से ही इंतजाम कर रखा है कि उन्हें इनकम टैक्स ना देना पड़े। इसमें प्रावधान है कि विधायकों की आय पर इनकम टैक्स का भुगतान सरकारी खजाने से होगा। पंजाब और हरियाणा में विधायकों के इनकम टैक्स भुगतान में काफी अंतर है। इसकी बड़ी वजह यही है कि हरियाणा के विधायकों और मंत्रियों का वेतन और भत्ते, पंजाब के विधायकों-मंत्रियों से काफी कम है।

पंजाब में विधायक का वेतन 84 हजार और मंत्री का सवा लाख मासिक है, जबकि हरियाणा में विधायक को 40 हजार रुपये और मंत्री को 50 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। हरियाणा में मुख्यमंत्री का वेतन भी 50 हजार रुपये मासिक है। उन्हें सभी भत्तों के साथ 2 लाख 57 हजार रुपये मासिक मिलते हैं।

मंत्री की मासिक आय 2 लाख 20 हजार और विधायक की मासिक आय 2 लाख 30 हजार रुपये है। विपक्ष के नेता की मासिक आय 2 लाख 22 हजार रुपये है। इसमें विशेष भत्ता, निर्वाचन भत्ता, दैनिक भत्ता, कार्यालय भत्ता, फोन भत्ता और एलटीसी की राशि भी शामिल है, जबकि इनकम टैक्स की गणना करते समय सिर्फ मूल वेतन और कुछ भत्तों को ही शामिल किया जाता है।

हरियाणा की मनोहर सरकार हालांकि खर्चों में कटौती की बात करती रही है, लेकिन वह माननीयों का इनकम टैक्स देना बंद कर उनकी नाराजगी मोल लेने की स्थिति में नहीं आना चाहती है। इसकी एक वजह यह भी है कि विधायक हर विधानसभा सत्र में दूसरे राज्यों में विधायकों के बढ़े वेतन का हवाला देते हुए अपना वेतन भी बढ़ाने का दबाव सरकार पर बनाते है।

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