सोनीपत के हिमांशुु के पापा जिस खेल से चिढ़ते थे, आज उसी पर गर्व है

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अंडर-19 वर्ल्ड कप 2018 के फाइनल में शनिवार को टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को हरा कर खिताब पर कब्जा किया। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए भारत को 217 रन का टारगेट दिया था। भारत ने 11 ओवर बाकी रहते ही मैच जीत लिया। इसी टीम का हिस्सा थे सोनीपत के हिमांशु राणा, जिन्होंने वर्ल्ड कप में दो मैच खेले। जीत के बाद अब बीसीसीआई ने सभी टीम मेंबर को 30-30 लाख रुपये देने की घोषणा की है।

लेकिन हिमांशु के पापा उसके इस खेल से चिढ़ते थे और उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे। लेकिन हिमांशु को क्रिकेट खेलना पसंद था। जब पिता ने देखा के बेटे का मन खेल में ज्यादा है तो उन्होंने उसे क्रिकेट खेलने का पूरा मौका दिया।

जीत के बाद हिमांशु ने कहा कि जितनी मेहनत मैंने की उससे कई ज्यादा उनके पिता ने की, क्योंकि उसको खुद स्कूटर पर मैदान तक छोड़ना और लाना उनकी दैनिक क्रिया का अहम हिस्सा था।
पहले वे टीचिंग की ड्यूटी करके आते, इसके बाद बेटे को मैदान छोड़ने जाते थे।

हिमांशु सोनीपत की ओर से सबसे कम उम्र में हरियाणा की अंडर-19 टीम का कप्तान बने, फिर नॉर्थ जोन की कप्तानी भी की।
इसके बाद रणजी ट्रॉफी में शानदार अर्धशतक के साथ 7 मैचों में 700 से ज्यादा रन बनाए।
पहले साल एशिया कप में मैन ऑफ द टूर्नामेंट बना, अगले साल भारतीय टीम की कप्तानी भी संभाली।

लेकिन हिमांशु के पापा उसके इस खेल से चिढ़ते थे और उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे। लेकिन हिमांशु को क्रिकेट खेलना पसंद था। जब पिता ने देखा के बेटे का मन खेल में ज्यादा है तो उन्होंने उसे क्रिकेट खेलने का पूरा मौका दिया।

जीत के बाद हिमांशु ने कहा कि जितनी मेहनत मैंने की उससे कई ज्यादा उनके पिता ने की, क्योंकि उसको खुद स्कूटर पर मैदान तक छोड़ना और लाना उनकी दैनिक क्रिया का अहम हिस्सा था।
पहले वे टीचिंग की ड्यूटी करके आते, इसके बाद बेटे को मैदान छोड़ने जाते थे।

हिमांशु सोनीपत की ओर से सबसे कम उम्र में हरियाणा की अंडर-19 टीम का कप्तान बने, फिर नॉर्थ जोन की कप्तानी भी की।
इसके बाद रणजी ट्रॉफी में शानदार अर्धशतक के साथ 7 मैचों में 700 से ज्यादा रन बनाए।
पहले साल एशिया कप में मैन ऑफ द टूर्नामेंट बना, अगले साल भारतीय टीम की कप्तानी भी संभाली।

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