हरियाण्वी लेखक और कलाकार राजीव राठी नहीं रहें, दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत

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राजीव राठी किसी पहचान की मोहताज नहीं है। हरियाण्वी सिनेमा और हरियाण्वी कला को एक नई दिशा, नई पहचान देने का श्रेय राजीव राठी को जाता है।

हर समय चेहरे पर हंसी और मुस्कान लिए रहने वाले राजीव राठी का 49 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई।

बता दें कि राजीव राठी ने कई कलाकारो को हरियाण्वी सिनेमा में पहचान दिलवाई है, उनकी कला को पहचाना है। राजीव राठी अपने जीवन में अब तक 1000 से ज्यादा गानें और कईं फिल्मों का निर्देशन कर चुके है।

एक दौर था जब पैसे ना होने के कारण गाने नहीं बन पाते थे, उस दौर में भी राठी ने बहुत सारे गानों का निर्देशन किया था। राठी का पैतृक गांव भापदौड़ा है।

राजीव राठी ने 1991 से रागिनी लिखना शुरू किया था। “कॉलेज में पपलू आंवे प्यारे-प्यारे” से रागिनी से वे काफी लोकप्रिय हो गए थे। बाद में वे भजन, पॉप, फोक भी लिखने लगे थे।

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