1 हजार पुरुषों पर 937 महिलाएं, पहलवानी से लेकर खूबसूरती तक सारी चुनौती पार कर छा गई हरियाणवी छोरियां

हरियाणा

महिलाओं को अपना हक न मिलना, बलात्कार, कन्या भ्रूण हत्या, पुरुषवादी मानसिकता यही सब हरियाणा की पहचान थी। एक समय था जब लड़कियों को लड़को के मुकाबले अपना हक नहीं मिलता था।

एक लड़की बड़े होकर क्या बनना चाहती है? उसके क्या सपने है, जिन्हें वो पूरा करना चाहती है। ये सब बातें कोई नहीं जानना चाहता था और न ही उन्हें ये बताने की इजाज़त थी।

लोकिन कुछ जांबाज महिलाओं की जांबाजी से लोगों की सोच बदली। जब साक्षी मलिक देश की शीर्ष महिला पहलवान बनी तो सभी को लगा की हमारी बेटी भी हमारे देश-प्रदेश का नाम रोशन कर सकती है।

चाहे पहलवानी हो या खूबसूरती हर क्षेत्र में धीरे- धीरे हरियाणा की छोरियों ने एक बड़ा मुकाम हसिल किया है। अब आलम ये है कि यहां हर एक हजार पुरुषों पर महिलाएं 871 से बढ़कर 937 हुईं हैं।

हरियाणा की महिलाएं रूढ़ियां तोड़ती दिख रही हैं। पिछले कुछ सालों में यहां महिलाओं ने अपनी स्थिती भी सुधारी है।
खेल, पहलवानी, खूबसूरती के अलावा महिलाओं की राजनीति में भी भागीदारी बढ़ी है। दो साल पहले पंचायती राज चुनाव में 33 फीसदी सरपंचों की जगह अब 42 फीसदी महिलाएं सरपंच बनी हैं। कुल 2555 महिला सरपंज हैं। इसलिए अब हरियाणा देश में सबसे ज्यादा महिला विधायकों वाले प्रदेशों में से भी एक है।

इतना ही नहीं यहां पढ़ाई- लिखाई में भी पुरुषों की तुलना में महिलाएं तेजी से बढ़ रही हैं। 10 साल पहले साक्षरता दर जहां 60.4 प्रतिशत थी, अब वहीं 75.4 फीसदी है।

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 2014-15 में यहां प्रति एक हजार पुरुषों पर 872 महिलाएं थी, अब 937 हैं। प्रदेश में महिलाओं के 12472 सेल्फ हेल्प ग्रुप सक्रिय हैं, जिनमे डेढ़ लाख महिलाएं स्वरोजगार चला रही हैं।

सरकार नोकरियों की बात करें तो इनमें लगभग 44 % महिलाएं हैं और 45 फीसदी महिलाओं के बैंक में खाते हैं, जो कि 10 साल पहले सिर्फ 12 फीसदी थे।

देश की महिलाएं तेजी से बढ़ रही हैं, सारी चुनौतियों को पार कर अब महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी जगह बना ली है।

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