हरियाणा विधानसभा में 18 बिल पारित, गेस्ट टीचरों का विधेयक अहम

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 27 Feb, 2019
हरियाणा विधानसभा में आज 18 बिल पारित किये गए, जिनमें हरियाणा अतिथि शिक्षक सेवा विधेयक, 2019; हरियाणा सेवा का अधिकार (संशोधन) विधेयक,2019; हरियाणा नगरपालिका क्षेत्रों में अपूर्ण नागरिक सुख-सुवधिाओं तथा अवसंरचना का प्रबंधन (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक, 2019; हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2019; हरियाणा नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2019;  हरियाणा नगर मंनोरंजन शुल्क विधेयक, 2019; पंजाब आबकारी (हरियाणा विधिमान्यकरण) विधेयक, 2019;  पंजाब श्रमिक कल्याण निधि (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2019;  हरियाणा लोक वित्त उत्तरदायित्व विधेयक 2019; पंजाब न्यायालय (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2019;  हरियाणा पशु (पंजीकरण, प्रमाणीकरण और प्रजनन) विधेयक,2019; हरियाणा विनियोग (संख्या 1) विधेयक, 2019; पंजाब भू-परिरक्षण (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2019; विद्युत (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2019; हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक,2019 और हरियाणा नैदानिक स्थापन (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) अंगीकरण (संशोधन) विधेयक, 2019, हरियाणा विधानसभा (सदस्य-सुविधा) संशोधन विधेयक, 2019 और हरियाणा विधानसभा (सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेंशन) संशोधन विधेयक, 2019 शामिल हैं।
 
हरियाणा अतिथि शिक्षक सेवा विधेयक, 2019
हरियाणा अतिथि शिक्षक सेवा विधेयक, 2019 विद्यालय शिक्षा विभाग, हरियाणा में अतिथि संकाय/तदर्थ/ संविदात्मक आधार के रूप में नियोजित शिक्षकों की सेवा का उपबन्ध करने हेतु पारित किया गया। वर्ष 2005 में विभाग द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए कि अध्यापकों की कर्मी के कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों के मुखिलाओं /खण्ड शिक्षा अधिकारियों को क्रमांक संख्या 15/59-2005 तम (3) 29-11-2005, 16-12-2005 तथा 18-9-2006 के अनुसार अधिकृत किया गया था कि वे अपने विद्यालयों में अध्यापकों के स्वीकृत पदों तथा छात्र संख्या को ध्यान में रखते हुए यदि आवश्यक हो तो अतिथि  अध्यापकों की नियुक्ति कर लें। आरम्भ में इन अतिथि अध्यापकों को प्रति पीरियड प्रतिदिन के आधार पर एक निश्चित मानदेय पर नियुक्त किया गया था परन्तु दिनांक 01-04-2009 से अतिथि अध्यपाकों को वार्षिक अनुबन्ध आधार पर निश्विचत मानदेय पर नियुक्त किया गया था। इसलिए यह प्रस्तावित है कि पहले  से अतिथि संकाय के आधार पर लगे अध्यापकों की नियुक्ति को वैधता प्रदान की जाए तथा उन्हें सेवानिवृत्ति की आयु तक विभाग में कार्य करने की अनुमति प्रदान की जाए।
हरियाणा सेवा का अधिकार (संशोधन) विधेयक,2019 
हरियाणा सेवा का अधिकार (संशोधन) विधेयक,2019 हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 को आगे संशोधित करने के लिए पारित किया गया। इसके अनुसार राज्य आयोग/प्राधिकरण के किसी भी अध्यक्ष/सदस्य चाहे वह सांविधानिक या वैधनिक हो, को मुख्य सचिव/प्रधान सचिव हरियाणा सरकार को यथा अनुज्ञेय तथा पूर्व सेवा के लिए प्राप्त की गई पेंशन, यदि कोई हो, को घटा कर, से अधिक वेतन की अनुमति नहीं दी जाएगी। अन्य सभी भत्ते और सुविधा भी मुख्य सचिव/प्रधान सचिव, जैसी भी स्थिति हो, से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि अध्यक्ष/ सदस्य पहले से ही किसी सरकार का पेंशनर है तो किसी भी आयोग/प्राधिकरण में की गई सेवा के लिए कोई भी अतिरिक्त पेंशन या मृत्यु एवं सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी की अनुमति नहीं दी जाएगी। 
हरियाणा नगरपालिका क्षेत्रों में अपूर्ण नागरिक सुख-सुवधिाओं तथा अवसंरचना का प्रबंधन (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक, 2019
हरियाणा नगरपालिका क्षेत्रों में अपूर्ण नागरिक सुख-सुवधिाओं तथा अवसंरचना का प्रबंधन (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक, 2019 हरियाणा नगरपालिका क्षेत्रों में अपूर्ण नागरिक सुख-सुवधिाओं तथा अवसंरचना का प्रबंधन (विशेष उपबंध) अधिनियम, 2016 को संशोधित करने के लिए पारित किया गया।
हरियाणा नगरपालिका क्षेत्रों में अपूर्ण नागरिक सुख-सुवधिाओं तथा अवसंरचना का प्रबंधन (विशेष उपबंध) अधिनियम, 2016 पालिका सीमाओं में पडऩे वाले उन क्षेत्रों को पहचानने के लिए अधिनियमित किया गया था। जहां 31 मार्च, 2015 से पूर्व 50 प्रतिशत प्लाटों पर निर्माण किया जा चुका है, को नागरिक सुख-सुविधाओं तथा अवसंचरना प्रदान करने के लिए इन क्षेत्रों का नागरिक सुख-सुविधाओं तथा अवसंरचना अपूर्ण नगरपालिका क्षेत्र घोषित किया जाना है। इस अधिनिमय की धारा-4 ‘प्रवर्तन अस्थगित रखना’ एक वर्ष की अवधि के लिए थी जो 20 अप्रैल, 2017 तक थी। चूंकि अनाधिकृत कालोनियों को घोषित करने की प्रक्रिया एक साल में पूर्ण नहीं हो सकी। इसलिए अधिनिमय में एक साल की अवधि को दो साल का संशोधन अधिसूचना दिनांक 23.11.2017 द्वारा किया गया था। उपरोक्त अधिनियम की वैधता 20.04.2018 तक थी। इस बीच, अनाधिकृत कालोनियों की घोषणा के संबंध में कार्रवाई दो वर्षों के अन्दर पूरी नहीं की जा सकी, इसलिए अधिनियम में एक और संशोधन करते हुए समयसीमा को ‘दो वर्ष’ से ‘तीन वर्ष’, अधिसूचना दिनांक 19.04.2018 द्वारा बढ़ाया गया। उक्त संशोधन के अनुसार अधिनियम दिनांक 19.04.2019 तक वैध है। कॉलोनियों की घोषणा से संबंधित सभी कार्रवाई वैधता अवधि के अंदर पूरी की जानी है। लेकिन यह देखते हुए कि कुछ कॉलोनियों को अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया है, जिनमें अधिनियम में निर्दिष्टï वैध अवधि से अधिक समय लगेगा, इसलिए प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अधिनियम की धारा 4 में कथित समयावधि को बढ़ाया जाना है। अत: यह प्रस्तावित है कि इस अधिनियम के अनुभाग 4(1) तथा 4(2) में ‘तीन साल’ को शब्दों ‘चार साल’ से बदल दिया जाए ताकि ऐसे योग्य क्षेत्रों को नागरिक सुख-सुवधिाओं तथा अवसंरचना अपूर्ण नगरपालिका क्षेत्र घोषित करने के लिए एक अन्य साल उपलब्ध करवाया जा सके तथा इन क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जा सके। 
 
हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2019
हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2019 हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 को आगे संशोधित करने के लिए पारित किया गया। सरकार द्वारा नगर निगमों में मेयर का चुनाव सीधे तौर पर योग्य मतदाताओं द्वारा राज्य चुनाव आयोग की देख रेख, निर्देशन तथा नियंत्रण में करवाने के लिए विधि एवं विधायी विभाग की अधिसूचना संख्या लेज. 33/2018, दिनांक 4.10.2018 द्वारा प्रावधान किया गया है। हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमावली, 1994 के नियम 72 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार ‘वरिष्ठï उप-महापौर व उप-महापौर के चुनाव में उपस्थित सदस्यों द्वारा वोट डाले जाने का प्रावधान है। इससे पूर्व महापौर को निगम के सदस्यों से ही चुना जाता था, जो निगम की बैठकों में बतौर सदस्य  वोट डालने का अधिकार रखता था। विधि एवं विधायी विभाग परामर्श दिया गया है कि ‘‘यद्यपि वरिष्ठï उप-महापौर व उप-महापौर के चुनाव में महापौर द्वारा हरियाणा नगर निगम अधिनियम,1994 में  वोट डाले जाने का कोई स्पष्टï प्रावधान नहीं है, तथापि अधिनिमय, 1994 की धारा-4 की उपधारा (2) तथा (3) को संयुक्त रूप से पढऩे पर विधान का उद्देश्य दर्शाता है कि सीधे तौर पर निर्वाचित महापौर निगम के अन्य निर्वाचित सदस्यों के समान है।’’ इसलिए, स्पष्टï प्रावधान करने के लिए हरियाणा नगर निगम 1994 की धारा-2 की उपधारा (24) में संशोधन किया जाना है। 
 
हरियाणा नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2019
हरियाणा नगरपालिका अधिनियम,1973 को आगे संशोधित करने के लिए हरियाणा नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित किया गया। इसके अनुसार हरियाणा नगरपालिका अधिनियम,1973 की धारा-13 में वर्णित प्रावधान अनुसार, उपायुक्त को पालिका के सदस्य का त्यागपत्र स्वीकृत करने के की शक्ति प्रदान की गई है तथा त्यागपत्र सरकारी राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा, परन्तु यह वर्णित नहीं है कि यह त्यागपत्र किस प्राधिकारी द्वारा सरकारी राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा। विधि एवं विधायी विभाग द्वारा किसी प्रकार की अस्पष्टïता से बचने के लिए तथा स्थिति स्पष्टï करने हेतु, प्राधिकारी जैसा उचित समझे, को इस प्रभाव के एक संशोधन की पालना करते हुए सरकार द्वारा स्पष्टï करने  हेतु प्रावधान करने का परामर्श दिया गया है। इसलिए, हरियाणा नगरपालिका अधिनियम,1973 की धारा-13 में यह प्रावधान किया जाना है कि पालिका के सदस्य का त्यागपत्र सरकार द्वारा सरकारी राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा। यह निरीक्षण किया गया है कि पालिकाओं में निर्वाचित सदस्यों द्वारा प्रधान व उप-प्रधान का चुनाव, राज्य चुनाव आयोग द्वारा निर्वाचित सदस्यों की अधिसूचना जारी करने की दो माह की निर्धारित अवधि में पूर्ण नहीं किया जा रहा है। पालिकाओं में प्रधान व उप-प्रधान का चुनाव निर्वाचित सदस्यों द्वारा समयबद्घ तरीके से करने के लिए हरियाणा नगरपालिका अधिनियम,1973 की धारा 18क को सम्मिलित किया जाना प्रस्तावित किया गया है कि यदि निर्वाचित सदस्य उनके निर्वाचन की अधिसूचना जारी होने के पांच माह के अंदर प्रधान व उप-प्रधान का चुनाव करवाने में असफल रहते हंै तो उन्हें यह स्पष्टï नोटिस देकर बैठक आयोजित की जाएगी कि यदि छ: माह की अवधि तक वह प्रधान व उप-प्रधान का चुनाव नहीं कर पाते हैं तो बिना किसी नोटिस या आदेशों के निर्वाचित सदन को भंग समझा जाएगा। 
 
हरियाणा नगर मंनोरंजन शुल्क विधेयक, 2019
सार्वजनिक मनोरंजनों में प्रवेश के बारे में मनोरंजन शुल्क उद्ग्रहण करने हेतु उपबंध करने के लिए हरियाणा नगर मंनोरंजन शुल्क विधेयक, 2019 पारित किया गया। सार्वजनिक मनोरंजनों में प्रवेश के संबंध में मनोरंजन शुल्क के उपग्रहण के लिए उपलब्ध करना। भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (सूची-2) की प्रतिस्थापित प्रविष्टिï संस्था-62 मनोरंजन पर करों के उदग्रहण के लिए नगरपालिकाओं को सशक्त बनाती है। 
पंजाब आबकारी (हरियाणा विधिमान्यकरण) विधेयक, 2019
पंजाब आबकारी अधिनियम, 1914, हरियाणा राज्यार्थ की धारा 59 के अधीन जारी अध्ािसूचना संख्या 7/आ01/पं0अ01/1914/धारा59/2017, दिनांक 29 मार्च,2017 के अधीन जारी किए गए आदेशों की गई कार्रवाईयों तथा किए गए कार्यों को विधिमान्य करने के लिए पंजाब आबकारी (हरियाणा विधिमान्यकरण) विधेयक, 2019 पारित किया गया। वर्ष 2017-18 के लिए आबकारी नीति में, जैसा कि मंत्रिपरिषद, हरियाणा द्वारा अनुमोदित किया गया था, यह निर्धारित किया गया था कि राज्य में एक एल-1 बी.एफ. लाईसेंसधारी होगा, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये आरक्षित मूल्य तय किया गया था। पहले के आदेशों की तरह हरियाणा शराब लाईसेंस नियम, 1970 में आवश्यक परिवर्तन लाने के लिए आबकारी एवं कराधान आयुक्त द्वारा पंजाब एक्साइज एक्ट,1914 की धारा 59 के तहत उसकी शक्तियों का प्रयोग करते हुए 29 मार्च,2017 को एक अधिसूचना जारी की गई थी जो मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित आबकारी नीति के अनुसार थी। आबकारी आयुक्त द्वारा जारी इस अधिसूचना के खिलाफ दायर एक याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसके बाद, एसएलपी में सर्वोच्च न्यायालय ने बहुमत के निर्णय के माध्यम से आबकारी आयुक्त द्वारा अधिकारातीत रूप में उक्त अधिसूचना को धारण किया जबकि यह अधिसूचना जारी करने की शक्तियां राज्य सरकार के पास निहित हैं। 
 
पंजाब श्रमिक कल्याण निधि (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2019  
पंजाब श्रमिक कल्याण निधि (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2019 पंजाब श्रमिक कल्याण निधि अधिनियम, 1965, हरियाणा राज्यार्थ, को आगे संशोधित करने के लिए पारित किया गया। पंजाब श्रमिक कल्याण निधि अधिनियम, 1965 श्रम कल्याण गतिविधियों के लिए वित्त उपलब्ध करवाने हेतु एक निधि का गठन करने के लिए अधिनियमित किया गया था ताकि श्रमिक तथा उनके आश्रित पारिवारिक सदस्यों हेतु ऐसी गतिविधियों का संचालन किया जा सके। कई वर्षों से अनुभव किया जा रहा है कि अधिनियम के अंर्गत गठित निधि निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति हेतु पर्याप्त नहीं है। इसलिए उद्देश्यप्राप्ति के लिए निधि के स्रोतों को बढ़ाए जाने की प्रक्रिया को सुगम बनाना आवश्यक है और इसलिए विधेयक के माध्यम से अधिनियम में आवश्यक संशोधन प्रस्तावित है।
हरियाणा लोक वित्त उत्तरदायित्व विधेयक 2019
हरियाणा लोक वित्त उत्तरदायित्व विधेयक, 2019 लेखादायी तथा संपरीक्षा योग्य संस्था के समुचित लेखा और संपरीक्षा प्रणाली के माध्यम से उत्तरदायित्व को सुकर बनाने हेतु दक्ष तथा प्रभावी प्रणाली के द्वारा राज्य के वित्तीय प्रशासन में उत्तरदायित्व हेतु तथा इससे संबंधित या आनुशंगिम मामलों के लिए बंद करने हेतु पारित किया गया। इसका उद्देश्य सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, सहकारी समितियों, विन्न्विद्यालयों, स्थानीय प्राधिकरणों, निकाय, सार्वजनिक संस्थान; और राज्य सरकार, गैर-सरकारी संगठनों द्वारा स्थापित, नियंत्रित या वित्त पोषित, जो राज्य सरकार से अनुदान-सहायता या अंशदान प्राप्त  करते हैं और वे सभी निकाय जो किसी भी रूप में राज्य सरकार से सार्वजनिक धन प्राप्त करते हैं, वे संगठन जो राज्य के समेकित कोष से धन प्राप्त करते हैं, में उपयुक्त वैधानिक लेखा और लेखा परीक्षा प्रणाली के माध्यम से जवाबदेही की सुविधा के लिए एक कुशल और प्रभावी प्रणाली के माध्यम से राज्य के वित्तीय प्रशासन में जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पारित किया गया।
पंजाब न्यायालय (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2019  
पंजाब न्यायालय अधिनियम, 1918, हरियाणा राज्यार्थ, को आगे संशोधित करने के लिए पंजाब न्यायालय (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2019 पारित किया गया। पंजाब तथा हरियाणा उच्च न्यायालय, चण्डीगढ़ ने सिविल न्यायधीशों के पद संज्ञा बदलने के लिए पंजाब न्यायालय अधिनियिम, 1918 की धारा 18 के संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना दिनांक 12 मार्च, 2004 को प्रतिस्थापित करने हेतु सिफारिश की हैं।  पहले अखिल भारतीय न्यायाधीश संगठन एवं अन्य बनाम केन्द्र सरकार व अन्य के मामले में सिविल याचिका क्रमांक 1022 ऑफ 1989 में सर्वोच्च न्यायालय ने न्याययिक अधिकारियों की पद संज्ञा बदलने के निर्देश दिए थे। उक्त याचिका में इन निर्देशों की अनुपालना में पंजाब तथा हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब न्यायालय अधिनियम, 1918 के अनुभाग-18 में राज्य के सिविल न्यायाधीशों की पद संज्ञा बदलने हेतु संशोधन करने की सिफारिश की थी और हरियाणा सरकार द्वारा इस संबंध में एक अधिसूचना भी जारी की गई थी। अब उच्च न्यायालय ने सूचित किया है कि सिविल न्यायाधीशों की वर्तमान पद संज्ञा, पहले राष्ट्रीय न्यायायिक वेतन आयोग द्वारा सुझाए गए सिविल न्यायाधीशों की नामावली की तुलना में सरल है। इसलिए हरियाणा द्वारा जारी की गई अधिसूचना दिनांक 12 मार्च, 2004 को प्रतिस्थापित किया जाए। 
हरियाणा पशु (पंजीकरण,प्रमाणीकरण और प्रजनन) विधेयक,2019
हरियाणा पशु (पंजीकरण,प्रमाणीकरण और प्रजनन) विधेयक,2019 राज्य में पशुओं के पंजीकरण और प्रमाणीकरण द्वारा कृत्रिम गर्भाधान, इन विट्रो निषेचन, भ्रूण हस्तांतरण प्रौद्योगिकी इत्यादि के माध्यम से पशु वीर्य और भ्रूण के उत्पादन, प्रसंस्करण, भण्डारण, विक्रय और वितरण के लिए पशुओं के प्रजनन के उपयोग सहित पशु प्रजनन क्रियाओं और अनियमित प्रजनन क्रिया के माध्यम से पशुओं के स्वामियों के उत्पीडऩ को रोकने को विनियमित करते हुए पशुओं के कल्याण तथा आनुवंशिक सुधार के लिए और इससे सम्बन्धित या इससे आनुषंगिक मामलों के लिए पारित किया गया।
हरियाणा विनियोग (संख्या 1) विधेयक, 2019 
हरियाणा विनियोग (संख्या 1) विधेयक, 2019 मार्च, 2020 के इकतीसवें दिन को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के दौरान सेवाओं के लिए हरियाणा राज्य की संचित निधि में से कतिपय राशियों के भुगतान और विनियोग का प्राधिकार देने के लिए पारित किया गया।
यह विधेयक भारत के संविधान के अनुच्छेद 204(1) के अधीन हरियाणा राज्य की संचित निधि में से ऐसी धन राशियों के विनियोग के लिए उपबन्ध करने हेतु पारित किया गया, जो विधानसभा द्वारा किये गये अनुदानों और राज्य की संचित निधि पर प्रभारित खर्च को पूरा करने के लिए आवश्यक है, किन्तु ऐसी राशियां किसी भी दशा में उस राशि से अधिक नहीं होंगी, जो सदन के सामने पहले रखे गये विवरण में दशाई गई हैं। 
 
विद्युत (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2019 
विद्युत (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2019 विद्युत अधिनियम, 2003, हरियाणा राज्यार्थ, को आगे संशोधत करने के लिए पारित किया गया। विद्युत अधिनियम,2003 के प्रावधानों के अनुसार, विद्युत के अनाधिकृत उपयोग के आधार पर किसी व्यक्ति से वसूल की जाने वाली राशि का निर्धारण विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 126 के अधीन एक आदेश के तहत निर्धारण अधिकारी द्वारा किया जाता है। विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 127 की उप-धारा (1) में प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति  धारा 126 के अधीन किए गए निर्धारण के अंतिम आदेश से व्यथित है तो वह अपीलीय प्राधिकारी के  समक्ष अपील दायर कर सकता है। धारा 127 की उप-धारा (2)में आगे प्रावधान है कि ऐसी अपील पर केवल तभी विचार किया जाएगा यदि व्यक्ति लाइसैंसी को निर्धारित रकम का आधा जमा करवाता है। 
राज्य सरकार द्वारा यह अवलोकन किया गया था कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 127 की उप -धारा(2) के इस प्रावधान के अधीन व्यथित उपभोक्ताओं को अपील दायर करने से पहले  से 50 प्रतिशत (निर्धारित राशि का आधा) भुगतान की मांग के कारण अपील दायर करने में विचारणीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्युत उपभोक्ताओं को पेश आ रही कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री की स्वीकृति से निर्धारित राशि का 50 प्रतिशत जमा करवाने की शर्त मे छुट देने, निर्धारण आदेश के विरूद्घ अपील दायर करने के लिए निर्धारित राशि का पांचवा हिस्सा जमा करवाने का निर्णय लिया गया था। 30 मई, 2018 को हुई बैठक में मंत्रिमण्डल द्वारा ज्ञापन पर विचार-विमर्श करने उपरांत स्वीकृत किया गया। 
 
हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2019
हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2019 हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 को आगे संशोधन करने के लिए पारित किया गया।
ग्राम पंचायतों के सभा क्षेत्रों में संचार टावरों को इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, हरियाणा द्वारा अधिसूचित संचार एवं संयोजकता अवसंरचना नीति के अनुरूप विनियमित किया जाना वांछित है। इसलिए इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, हरियाणा द्वारा समय-समय पर अधिसूचित संचार एवं संयोजकता अवसंरचना नीति को अपनाने के लिए हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 45 क में संशोधन तथा धारा 209 की उप-धारा (2) के खण्ड (फ)को लोपित किया जाना आवश्यक है। 
 
हरियाणा नैदानिक स्थापन (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) अंगीकरण (संशोधन), विधेयक,2019 
हरियाणा नैदानिक स्थापन (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) अंगीकरण (संशोधन), विधेयक, 2019 हरियाणा नैदानिक स्थापन (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) अंगीकरण अधिनियम, 2018 को संशोधित करने के लिए पारित किया गया। गुणवत्ता स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना संविधान के अनुच्छेद 47 का जनादेश है। सुविधाओं के विहित न्यूनतम मानकों के दृष्टिïगत तथा राज्य में नैदानिक स्थापना के पंजीकरण और विनियमन के लिए और इससे सम्बन्धित या उससे आनुषगिक मामलों को विहित करने हेतु हरियाणा सरकार द्वारा  25 जनवरी, 2018 को नैदानिक स्थापन (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 (2010 का केन्द्रीय अधिनियम 23) का अंगीकरण किया गया था। यह अधिनियम पचास बिस्तर से अधिक वाली सभी नैदानिक स्थापनों पर लागू है। अब, चिकित्सा नैदानिक प्रयोगशालाओं (या रोग विज्ञापन प्रयोगशालाएं) के न्यूनतम मानकों में सुधार करने हेतु हरियाणा सरकार द्वारा अधिनियम के कार्यक्षेत्र में चिकित्सा नैदानिक  प्रयोगशालाओं को शामिल करने का निर्णय लिया गया है।

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