3 साल से ज्यादा समय तक नहीं रहेगा अब कोई विभागाध्यक्ष, सरकार का नया आदेश

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हरियाणा सरकार ने प्रदेश में पदोन्नति द्वारा भरे जाने वाले विभागाध्यक्ष के पदों के लिए तीन वर्ष का कार्यकाल निर्धारित करने का निर्णय लिया है। इस बारे में राज्य मंत्रिमंडल ने पिछली कैबिनेट बैठक में फैसला ले लिया था।
सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से बताया गया है कि पदाधिकारी द्वारा विभागाध्यक्ष के रूप में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के उपरांत इस पद पर नियुक्ति के लिए फीडर पोस्ट पर कार्यरत अगले पात्र अधिकारी बारे विचार किया जाएगा और पदोन्नति के लिए उपयुक्त होने पर सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के साथ आवश्यक छूट देकर उसे समय पूर्व भी पदोन्नत किया जा सकता है। 
पात्र व्यक्ति उपलब्ध न होने की स्थिति में वर्तमान विभागाध्यक्ष की तीन वर्ष की पहली कार्यावधि पूर्ण होने के उपरांत भी उसे तीन वर्ष की एक और अवधि या फीडर पोस्ट से कनिष्ठ अधिकारी की पदोन्नति, जो भी पहले हो, तक का विस्तार दिया जा सकता है। यदि तीन वर्ष के दूसरे कार्यकाल के दौरान भी पदोन्नति के लिए फीडर पोस्ट पर कार्यरत किसी कनिष्ठ अधिकारी को उपयुक्त नहीं पाया जाता है तो वर्तमान विभागाध्यक्ष को तीन वर्ष की एक और अवधि या फीडर पोस्ट से कनिष्ठ अधिकारी की पदोन्नति, जो भी पहले हो, तक का विस्तार दिया जा सकता है। लेकिन किन्हीं भी परिस्थितियों में यह अवधि नौ वर्ष से अधिक नहीं होगी। 
विभागाध्यक्ष पहला कार्यकाल पूरा होने या दूसरे या तीसरे कार्यकाल के दौरान एक पात्र कनिष्ठ अधिकारी को विभागाध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर पहले के पदाधिकारियों को विभागाध्यक्ष (विशेष) के पदनाम के साथ उनके रैंक, कार्य क्षेत्र और कोर योग्यता के अनुसार अन्य कार्य सौंपा जाएगा।
इसके लिए विभाग में वित्त विभाग से सीमित अवधि अर्थात उसकी सेवानिवृत्ति की तिथि तक के लिए एक एक्स कॉडर पोस्ट सृजित करवाई जाएगी और विभागाध्यक्ष के रूप में पदोन्नत किए जाने वाले अधिकारी द्वारा खाली किए गए फीडर पोस्ट को उस अवधि के लिए खाली रखा जाएगा।
अधिकारी, जो विभागाध्यक्ष (विशेष) हैं, को राज्य सरकार या किसी अन्य सरकार के तहत किसी अन्य विभाग या बोर्ड या निगम में उसी या उससे उच्च पे-लेवल या स्केल में प्रतिनियुक्ति या विदेश सेवा पर भेजने पर भी विचार किया जा सकता है। 
यदि फीडर पोस्ट पर कार्यरत कनिष्ठ अधिकारी के विरूद्घ विभागीय या न्यायिक प्रक्रिया लम्बित होने के कारण उसे पदोन्नत नहीं किया जाता और बाद में किसी कनिष्ठ अधिकारी को विभागाध्यक्ष के पद पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया जाता है तो वह उस स्थिति में पूर्वप्रभाव से पदोन्नति प्राप्त करने के लिए पात्र नहीं होगा, यदि दूसरे या तीसरे कार्यकाल के लिए विभागाध्यक्ष के पद पर उससे वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त है।
प्रशासनिक विभागों को इस संबंध में अपने संबंधित सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए गए हैं और इसके लिए उन्हें सामान्य प्रशासन एवं वित्त विभाग से स्वीकृति प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी।

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