3 साल में चार गुना बढ़े नौकरी छोड़ने वाले जवान

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Yuva Haryana

New Delhi , (29 March 2018)

केंद्र सरकार देश की सुरक्षा में तैनात जवानों को बेहतर सुविधाएं दिए जाने का दावा किए जा रही है लेकिन, नौकरी छोड़ने वाले जवानों की बढ़ती संख्या कुछ और ही कहानी बता रही है। गृह मंत्रालय की तरफ से जारी कि गई एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 3 साल में पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों में नौकरी छोड़ने का ट्रेंड लगभग 4 गुना तक बढ़ गया है।

बेहतर करियर की चाह में 2017 में बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल के 14,587 जवानों और अधिकारियों ने स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया है। जबकि 2015 में यह आंकड़ा 3425 का था।

आंकड़ों को बारीकी को देखा जाए तो सीआरपीएफ और बीएसएफ के जवानों में नौकरी छोड़ने का ट्रेंड सबसे ज्यादा है। 2015 में सीआरपीएफ के 1376 जवानों ने नौकरी छोड़ी, जबकी 2017 में यह आंकड़ा बढ़कर 5123 पर पहुंच गया। यही हाल बीएसएफ के जवानों का भी रहा 2015 में 909 बीएसएफ जवानों ने नौकरी छोड़ी, वहीं 2017 में यह आंकड़ा 6400 को पार कर गया।

बता दें कि जवानों और अधिकारियों के नौकरी छोड़ने का यह सिलसिला 2024 तक जारी रहनेवाला है। जवान बेहतर करियर के लिए प्राइवेट सेक्टर में नॉकरियां तलाश रहे हैं जिस कारण वह नौकरी छोड़ देते है। सिक्योरिटी एजेंसी और ऐसे दूसरे करियर विकल्प भी जॉब छोड़ने के कारणों में से एक हैं।

 

 

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