Home सोशल-वायरल गांव के सरकारी स्कूल की याद दिलाती यह कविता “कैसे हो मेरे राजकीय सरकारी स्कूल?”

गांव के सरकारी स्कूल की याद दिलाती यह कविता “कैसे हो मेरे राजकीय सरकारी स्कूल?”

0
0Shares

सुनीता करोथवाल (कवयित्री)

Chandigarh, 13 Feb,2019

कैसे हो मेरे राजकीय सरकारी स्कूल,
क्या आज भी बिल्कुल वैसे ही हो
जैसा मैंनै बारहवीं के बाद तुम्हें छोड़ा था?

क्या आज भी तुम्हारी पीठ पर
एक मंजिल का हल्का सा बोझ है,
या बन चुके हो बहु मंजिला इमारत?

क्या आज भी तुम खुलकर हँसते हो
या रो रहे हो प्राइवेट स्कूलों की पैं पैं में?

क्या अब भी तुम्हारे कान में
प्रार्थना होती है,
जैसे मैं करती थी एक अकेली
और बाहर के गेट तक आवाज जाती थी।

क्या अब भी खेलते हैं लड़के क्रिकेट
बहुत खुले मैदान में,
और जीत कर लाते हैं मैडल बाहर के गाँव से,
हो जाती है छुट्टी जीत की खुशी में।

क्या अब भी होती है संसद की बैठक
तेजपाल सर की देख रेख में,
और बनती है विपक्ष की नेता
मुझ सी कोई सुनीता।

क्या अब भी कश्मीर पर चर्चे
चलते हैं ,
हिंदी के पीरियड में
वेद प्रिय सर सर्दी की धूप में
लगाते हैं क्या छत्त पर क्लास
और देते हैं कविता नए विषयों पर
लिखने के लिए।

क्या आज भी वैसे अध्यापक हैं तुम्हारे पास
जो मुझ सी नालायक का जीवन बदल गए।

क्या आज भी तुम भरे हुए हो वैसे ही बच्चों से
जैसे इन दिनों अपने गाँव की बेरी लदी हैं।
या उजड़ चुके
बेमौसम की सब्जी से जबर्दस्ती पैदा हुए
प्राइवेट स्कूलों की खूबसूरती में।

 

Sunita Karothwal

Load More Related Articles
Load More By Yuva Haryana
Load More In सोशल-वायरल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

युवा हरियाणा टॉप न्यूज में पढ़िए आज दिनभर की सभी बड़ी खबरें फटाफट

Yuva Haryana Top News, 12 july 2020 1. हरियाणा &…