मां दिव्यांग-पिता की हो चुकी है मौत, फिर भी बच्चों के सपनों को साकार करेगा पूरा गांव

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Yuva Haryana

Rewari, 28 Dec,2018

घर के नाम पर  एक कमरे का मकान, जिस पर पूरी छत तक नहीं है। सर्दी के चलते पिता पप्पू सिंह (50) की चार दिन पहले मृत्यु हो गई, मां आशा दिव्यांग है। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी और पढ़ाई करने की भी जिद। हालात ऐसे हो गए हैं कि घर खर्च चलाने के साथ ही पढ़ाई जारी रखने के लिए स्कूल से छुट्टी लेकर मजदूरी करनी पड़ रही है।

कहानी रेवाड़ी जिले के गांव गढ़ी निवासी एक परिवार की है। इन हालातों में भी इस परिवार के बच्चे अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ना चाहते। आशा को अगर दिव्यांगता व विधवा पेंशन मिल जाए, तो इन बच्चों के सपने साकार हो सकते हैं, मगर इस परिवार को अधिकारों की जानकारी नहीं। इसके चलते शत-प्रतिशत दिव्यांग होते हुए भी इनकी मां को आज तक पेंशन नहीं मिली।

ग्रामीणों ने बताया कि पप्पू सिंह दिव्यांग था, मगर थोड़ा बहुत चल फिर लेने के कारण छोटा बड़ा काम कर लेता था। रविवार को उसकी मृत्यु हो गई। पप्पू की पत्नी भी दिव्यांग है, जो चलने फिरने व अधिक काम करने में असमर्थ है। इनकी बड़ी बेटी मनीषा क्षेत्र के सरकारी कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष में पढ़ती है।

उससे छोटा अजय 12वीं कक्षा, वीना 10वीं में व सबसे छोटी दिव्या पहली कक्षा में पढ़ रही है। ये बच्चे ही मेहनत मजदूरी करते हैं, ताकि घर का खर्च और खुद की पढ़ाई का जो भी खर्च हो वो निकल सके। लेकिन अब परिवार तंगहाली में है और बच्चों की पढ़ाई छूटने की भी नौबत आ सकती है। लेकिन इन सबके बावजूद बच्चों ने यह जिद कर ली है कि वो मेहनत से पीछे नहीं हटेंगे। पूरा गांव बच्चों के इस जज्बे को सलाम करता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से भी मदद की गुहार लगाई है। इधर, शिक्षक भगवान बव्वा व रेवाड़ी के एडवोकेट कैलाश चंद ने महिला की विधवा व दिव्यांगता पेंशन और बच्चों की निराश्रित पेंशन बनवाने में मदद की पहल की है। कैलाशचंद ने कहा कि एक-दो दिन में औपचारिकताएं पूरी कर दी जाएंगी।

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