प्रदेश कर्जे में डूबा है और मुख्यमंत्री ने अपने सारे स्टाफ की सैलरी मनचाही बढ़ा ली, माफी मांगकर फैसला वापिस ले CM-अभय चौटाला

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हाल ही में मुख्यमंत्री के ओएसडी समेत कई निजी स्टाफ सदस्यों की तनख्वाह बढ़ाए जाने की विपक्ष के नेता अभय चौटाला ने कड़ी निंदा की है और मुख्यमंत्री से इसे तुरंत कैंसल करने की मांग की है।
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि यह सरकारी पैसे का दुरुपयोग है और जब प्रदेश कर्ज के बोझ में दबा पड़ा है ऐसे समय में अपने चहेतों में जनता की खून पसीने की कमाई की बंदरबांट अशोभनीय है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता से माफी मांगते हुए मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर यह फैसला तुरंत प्रभाव से वापिस लेना चाहिए।
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि जिन लोगों का वेतन बढ़ाया गया है उनकी नियुक्तियों का कोई आधार नहीं है। सरकार ने इन्हें पिक एंड चूज़ की पॉलिसी के तहत नियुक्त किया है। इनकी नियुक्तियां किसी भी संवैधानिक प्रक्रिया से नहीं हुई हैं और न इन नियुक्तियों का आधार योग्यता है तो वेतन वृद्धि का फैसला सरासर गलत है। अभय के अनुसार यह केवल मुख्यमंत्री के खास लोगों को आर्थिक लाभ देने का मामला है।
नेता विपक्ष ने आगे यह भी कहा कि भाजपा सरकार की जयंतियों, महोत्सवों और समागमों पर की गई फिजूलखर्ची की वजह से ही प्रदेश कर्जदार हुआ है। आज प्रदेश पर लगभग 1 लाख 62 हज़ार करोड़ का कर्ज है जिसमे 90226 करोड़ केवल साढ़े तीन साल के भाजपा राज में लिया गया है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं तो सरकार ने इतना कर्ज क्यों लिया और वो पैसा कहां खर्च हुआ, यह जांच का विषय है। सरकार को इस मामले पर श्वेत पत्र पेश करना चाहिए।
नेता विपक्ष ने यह भी कहा कि भाजपा राज में युवा बेरोजगार है, अनुबंधित आधार पर काम कर रहे कर्मचारी वेतन वृद्धि की मांगों को लेकर सड़कों पर है और किसान को सरकार की गलत नीतियों के चलते फसलों के पूरे दाम नहीं मिल रहे हैं। ऐसे हालात में करदाताओं के पैसे का इतने बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और फिजूलखर्ची निंदनीय है।

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