Home Breaking किसानों की फसलों को देरी से खरीद पर अभय चौटाला ने दिया सुझाव, 4-5 गांवों का ग्रुप बनाकर करवाएं खरीद

किसानों की फसलों को देरी से खरीद पर अभय चौटाला ने दिया सुझाव, 4-5 गांवों का ग्रुप बनाकर करवाएं खरीद

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Yuva Haryana, Chandigarh

हरियाणा सरकार द्वारा 15 अप्रैल से सरसों व 20 अप्रैल से गेहूं की फसल की खरीद शुरू करने के बयान पर इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने कहा कि सरसों की फसल तो पहले ही किसानों ने निकाल कर अपने घरों में मजबूरीवश भंडारण करके रख ली है। किसान तो गेहूं की अप्रैल के पहले हफ्ते में ही खऱीद शुरू करने की उम्मीद लिए बैठे थे और मेवात जिले में सरसों की फसल की आवक तो फरवरी के आखिरी हफ्ते में मंडियों में आनी शुरू हो जाती है और रिवाड़ी-नारनौल में मार्च माह के दौरान तैयार हो जाती है।

अब इस क्षेत्र के किसान सीधे कारखानों में समर्थन मूल्य से कम भाव पर सरसों बेचने पर मजबूर हैं। कोरोना वायरस की वजह से सरकार की मजबूरी को हम सभी समझते हैं और लाकडाउन का पालन करना भी अनिवार्य है परंतु किसानों की भी मजबूरी है कि उन्हें अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए भी तो पैसे की आवश्यकता है। सरकार किसानों की सरसों और गेहूं की खरीद के लिए जो प्रबंध करने जा रही है अगर वह पहले ही किए जाते तो किसानों को अपनी फसलें औने-पौने दामों पर मजबूरीवश न बेचनी पड़ती।
इनेलो नेता ने कहा कि गेहूं की खरीद 20 अप्रैल से पहले शुरू की जाए तो किसानों को भंडारण की व्यवस्था से छुटकारा मिल सकता है।

सरकार चार या पांच गांवों के ग्रुप बनाकर सरसों व गेहूं की खऱीद शुरू कर सकती है। इससे खरीद एजेंसी के अधिकारियों को भी सुविधा होगी और किसानों को भी सहूलियत होगी। अभी तक खऱीद के बारे में मंडियों में खरीद एजेंसियों द्वारा प्रबंध न के बराबर हैं। अभी तक यह भी सुनिश्चित नहीं कि कौन सी एजेंसी का किस मंडी में कितनी गेहूं व सरसों की खऱीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने कहा कि सूत्रों से पता चला है कि केंद्रीय नेतृत्व के दिशा-निर्देश के अनुसार इस बार केवल गेहूं की उतनी ही खऱीद की जाएगी जितनी सरकार को ‘जनतक वितरण प्रणाली’ में आवश्यकता है। सरकार को इस हालात में ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ की जो शर्तें हैं उनमें ढील देनी चाहिए क्योंकि हो सकता है सभी किसानों ने अपनी फसलों के ब्योरे का इस पोर्टल पर पंजीकरण न करवाया हो। सरसों व गेहूं की फसल के लिये सरकार को किसी भी तरह की पाबंदी या कैप नहीं लगाना चाहिए। किसान तो पहले ही रोजी-रोटी के मोहताज हैं, ऐसी शर्तें लगाना भाजपा-जजपा सरकार किसान विरोधी नीतियों को उजागर करती है और इस हालात में बोनस आदि की घोषणा करना तो किसानों को बहकाने वाली बातें हैं।

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