Home Breaking पंद्रह लाख रुपये वाले जुमले की तरह किसानों की आप दुगुनी करना भी एक नया जुमला- अभय सिंह चौटाला

पंद्रह लाख रुपये वाले जुमले की तरह किसानों की आप दुगुनी करना भी एक नया जुमला- अभय सिंह चौटाला

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Yuva Haryana, Chandigarh

विधानसभा सत्र के शुभारंभ पर महामहिम द्वारा किसानों को आप दुगुनी करने का संकल्प करने पर स्वागत करते हुए इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने कहा कि इससे खेतीबाड़ी का धंधा में मुनाफा होने की वजह से किसानों को राहत मिलेगी। किसान आत्महत्आएं नहीं करेंगे। युवाओं को स्वयं रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। परंतु सरकार यह बताने का कष्ट करे कि क्या वास्तव में खेतीबाड़ी अब मुनाफे का धंधा बनता जा रहा है जिसके आधार को मानकर किसानों की आप दुगुनी करने का प्रस्ताव है? क्या किसान को उसकी उत्पादक वस्तुओं का मंडी में उत्पादन लागत से ज़्यादा भाव मिल रहा है? क्या समर्थन मूल्य किसान की लागत के आधार पर निश्चित किया जाता है।
इनेलो नेता ने कहा कि ऐसा लगता है कि पंद्रह लाख रुपये खातों में जमा होने वाले जुमले की तरह किसानों की आप दुगुनी करना भी एक नया जुमला साबित होने की आशंका है। इनेलो विधानसभा सत्र में किसानों की आप कैसे दुगुनी होगी इस फार्मूले बारे जानने का प्रयास करेगी और भाजपा-जजपा की सरकार किस राशि को आधार मानकर आय दुगुनी करने की व्यवस्था करेगी?
इनेलो नेता ने कहा कि किसानी दिनोंदिन घाटे का धंधा होने कारण अधोगति की तरफ जा रही है। कर्ज में डूबे किसानों के परिवार आत्महत्आएं कर रहे हैं। क्या किसानों को उनके कर्ज पर ब्याज व जुर्माना का लगभग 4750 करोड़ रुपये की माफी की घोषणा करने पर ही आय दुगुनी हो जाएगी? सरकार अगर कारपोरेट घरानों का लगभग आठ लाख करोड़ रुपये के कर्जे की राशि  बटे खाते डाल सकती है तो किसानों को कर्ज से राहत देने में क्या परेशानी है। किसान अगर किश्त भरने में देरी करता है तो जेल के दरवाजे उसका इंतजार करते हैं। नीरव मोदी जैसे भगोड़े तो सरकार की दयादृष्टि से आसानी बाहर पलायन कर जाते हैं।
उन्होंने ने कहा कि जजपा चुनाव से पहले वादे कर रही थी कि सरकार बनने पर किसानों को समर्थन मूल्य से 10 फीसदी या सौ रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त राशि दी जाएगी। परंतु सरकार के सहयोगी बनते ही जजपा के सभी वादे रद्दी की टोकरी के महमान बन गए। नंगे बदन प्रदर्शन करने वालों ने अपनी तो आमदनी कई गुना बढ़ा ली है और किसानों को धान का घोटाला करके उनके तमाम बस्तर उतार लिए हैं। कृरिूर मंत्री कह रहे हैं किसान अब मंडी में स्वयं माल बेचेंगे जबकि बीस वर्ष से किसान अपनी मंडी नाम पर सब्ज़ी आदि बेच रहे हैं परंतु उनकी हालत जस की तस है।
इनेलो नेता ने कहा कि कृषि को अगर नफे का धंधा बनाना है तो स्वामीनाथन रिपोर्ट की शर्तों को सरकार द्वारा लागू करना अत्यावश्यक है। कृषि उत्पादन के प्रयोग में आने वाली वस्तुएं किसानों को सस्ते भाव पर उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। सरकार समर्थन मूल्य पर तमाम कृषि उपज वस्तुओं की खऱीद करे। किसान की आमदनी केवल नारों से दुगुनी नहीं होगी इसके लिए सरकार को धरातल पर किसानों के लिए अच्छे विकल्प ढूंढने से ही फायदेमंद नतीजे सामने आएंगे।
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