Home Breaking किसानों के मुद्दों पर जमकर बरसे अभय चौटाला, कृषि मंत्री को कही ये बड़ी बात

किसानों के मुद्दों पर जमकर बरसे अभय चौटाला, कृषि मंत्री को कही ये बड़ी बात

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 26 Nov, 2019
इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने कृषि मंत्री जेपी दलाल के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अभी तक अधिकारियों द्वारा राइस मिलर्स की निरीक्षण रिपोर्ट सरकार को सौंपी नहीं गई है परंतु कृषि मंत्री ने रिपोर्ट आनेे से पहले ही घोटाला करने वालों को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि प्रदेश में कोई धान घोटाला नहीं हुआ, जिससे लगता है कि कहीं न कहीं दाल में काला है। ये बड़ी अजीब बात है कि जिन अधिकारियों की मिलीभगत से धान व चावल का इतना बड़ा घोटाला हुआ है, सरकार ने उन्हीं अधिकारियों की राइस मिलर्स के स्टाक की जांच करने की जिम्मेवारी दी है। यह तो ऐसा लगा जैसे बिल्ली को दूध की रखवाली करने के लिए बैठा दिया गया हो।
इनेलो नेता ने बताया कि इतना बड़ा घोटाला फूड एंड सप्लाई, मार्केटिंग बोर्ड तथा अन्य खरीद एजेंसियों की मिलीभगत के बगैर व्यापारी वर्ग एक भी दाना दो नम्बर में खरीद नहीं सकता। कृषि मंत्री द्वारा रिपोर्ट आने से पहले इस घोटाले के बारे में क्लीन चिट देने से मालूम होता है या तो उनको इस पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं है या फिर अधिकारियों ने उनको भी अपने प्रभाव में लेकर इस पूरे घटनाक्रम को असफल करने का प्रयास किया है।
चौधरी अभय सिंह चौटाला ने हाल ही में विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाया था और मंडियों में स्वयं जाकर किसानों से बात करके नमी के नाम से काटी जाने वाली राशि के सबूत मुख्यमंत्री महोदय को चि_ी लिखकर देने का कार्य किया था। यह घोटाला सिर्फ पहली बार ही नहीं हो रहा, इससे पहले भी इनेलो पार्टी ने 13 अक्तूबर, 2016 को महामहिम को ज्ञापन देकर धान की खरीद के घोटाले के बारे में चेताया था कि सरकार धान व चावल खरीद के संबंधित अधिकारी व व्यापारी किसानों से 100 रुपए से लेकर 200 रुपए प्रति क्विंटल की कटौती कर रहे हंै। इसके उपरांत सरकार ने नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 22 प्रतिशत कर दी थी परंतु एक प्रतिशत नमी की कटौती 15.10 रुपए निश्चित करके किसानों को राहत देने की बजाय उनका अधिक शोषण किया गया। और तो और जो धान मिल मालिकों द्वारा खरीदे गए धान की सुखाई के लिए भी 11 रुपए प्रति क्विंटल खर्चा भी किसानों से काटा गया था। महामहिम के माध्यम से सरकार से किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच करवाने का आग्रह किया गया था परंतु उस समय भी अब की तरह वही ढाक के तीन पात और भाजपा सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
इनेलो नेता ने बताया कि जिन राइस मिलर्स का स्टॉक का निरीक्षण किया जा रहा है, उनकी रिपोर्ट सरकार को 27 नवम्बर को चंडीगढ़ मुख्यालय पर दी जानी है परंतु कृषि मंत्री का रिपोर्ट आने से पहले क्लीन चिट देना संदेह के घेरे में है। धान की सरकारी खरीद में जो घोटाला हुआ है उसमें बजाय राइस मिलर्स को प्रताडि़त किया जाए और उनके कारखानों पर पुलिस बैठा दी जाए, यह बहुत निंदनीय है क्योंकि व्यापारी सरकार को टैक्स देते हैं और उसके बदले में सरकार व समाज से मान-सम्मान की उम्मीद रखते हैं। परंतु सरकार ने तो व्यापारियों को ही चोर बना दिया जबकि जिन अधिकारियों व सरकार के चहेतों की मिलीभगत से ये घोटाला हुआ है उन्हीं को इस घोटाले बारे फैसला करने के लिए जज नियुक्त कर दिया।
इनेलो नेता ने बताया कि सरकार के चहेतों व खरीद एजेंसियों के अधिकारियों की मिलीभगत से पीआर धान 1400-1500 रुपए प्रति क्विंटल लेकर 1835 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से सरकारी खाते में डालकर 250 से लेकर 300 रुपए प्रति क्विंटल तक का मुनाफा कमाया है। जिन मिलों को खरीद एजेंसियों ने धान चावल निकालने के लिए अलॉट किया है उन्होंने प्रति क्विंटल 67 प्रतिशत चावल सरकार को देना है और फूड एंड सप्लाई विभाग तथा एफसीआई के अधिकारियों की मिलीभगत से धान की खरीद कागजों में दिखाकर चावल बिहार या यूपी आदि प्रदेशों से लाकर सरकार को सौंप दिया जाएगा। अपने धान व चावल के स्टॉक को पूरा करने के लिए दूसरी जगह से पर्चे कटवाकर निरीक्षण कर रहे अधिकारियों द्वारा स्टॉक पूरा करवाया जा रहा है।
इनेलो नेता ने बताया कि कृषि मंत्री जी तो कहते हैं कि उनके फार्म पर तो वह मजदूरों को 100 रुपए प्रतिदिन मजदूरी देते हैं जबकि किसी भी कामगार व मजदूर को नियमानुसार उपायुक्त द्वारा निश्चित की गई मजदूरी से कम कोई भी मजदूरी नहीं दे सकता। इसलिए ऐसा करके कृषि मंत्री जी कानून की उल्लंघना कर रहे हैं और लेबर विभाग को भी इसके बारे में हस्तक्षेप करते हुए कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। गठबंधन सरकार को इस धान व चावल के घोटाले के बारे में किसी निष्पक्ष एजेंसी या सीबीआई से जांच करवाई जानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ सके और जो राशि किसानों से धान में नमी के बहाने काटी गई है, उस राशि के बारे में बताया जाए कि यह राशि किसके खाते में गई है क्योंकि सरकार व अधिकारी इस बारे में चुप्पी साधे हुए हैं।
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