गन्ना किसानों के समर्थन में उतरे अभय चौटाला, सरकार को दी नसीहत

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 20 Nov, 2019
इनेलो विधायक चौधरी अभय सिंह चौटाला ने गन्ना किसानों की हो रही अनदेखी पर गठबंधन सरकार के रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई। मुख्यमंत्री के गृह जिले करनाल वाली शूगर मिल में 19 नवम्बर से पिराई कार्य शुरू हुआ है जबकि प्रदेश की चीनी मिलों में पिराई की शुरुआत अक्तूबर माह से शुरू हो जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि नारायणगढ़ चीनी मिल के पिछले पिराई सत्र की लगभग 44 करोड़ रुपए की राशि बकाया है जिसके बारे में मिल के अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
किसान यूनियन ने इस बारे कई बार धरना भी दिया लेकिन शूगर मिल के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने भी माना है कि हरियाणा की शूगर मिलें घाटे में चल रही हैं। परंतु इसके बावजूद भी सरकार समय पर शूगर मिलें चलाने के लिए और गन्ने की खरीद के लिए व्यापक प्रबंध करने में असफल है।
इनेलो नेता ने कहा कि शूगरकेन बोर्ड के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री हैं लेकिन अब तक गन्ने की पिराई व इसके भाव के बारे एक भी मीटिंग नहीं हुई है। अब जब मुख्यमंत्री द्वारा इस बाबत कोई मीटिंग ही नहीं ली गई है तो किसानों को पता ही नहीं है कि उन्हें गन्ने का भाव क्या मिलेगा, क्योंकि बोर्ड की मीटिंग में ही भाव निर्धारित किया जाता है। गठबंधन सरकार को किसानों की मुश्किलों से कोई लेना-देना नहीं है और अभी तक दोनों भागीदार हनीमून मनाने के मूढ में ही हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले सरकार के दोनों सहभागी दल किसानों की हर समस्या का समाधान पहली कलम से करने के वादे करते थे लेकिन सरकार बनते ही इन्होंने किसानों की गन्ने की समस्या को छोड़ अपने मंत्रियों के भत्ते बढ़ाने की समस्या जरूर पहली कलम से दूर कर ली हैं।
उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार ने  अपनी पहली ही मंत्रिमंडल बैठक में मंत्रियों के आवास-भत्ते और टेलीफोन आदि के खर्चों की सूची में तो 20-20 हजार रुपए तक की बढ़ौतरी तुरंत कर ली परंतु किसानों की मुश्किलों बारे सरकार का ध्यान ही नहीं है अर्थात् गठबंधन सरकार पर ‘अंधा बांटे रेवडिय़ां, अपने-अपनों को दे’ वाली कहावत बिल्कुल सही चरितार्थ होती है। उन्होंने कहा कि एक तो सरकार ने पिराई एक माह देर से शुरू कर रही है, जिससे किसानों की गन्ने की अगेती किस्म में चीनी की मात्रा कम होगी, इससे किसानों को गन्ने का भाव उचित नहीं मिलेगा और उनकी आर्थिक दशा पर विपरीत प्रभाव होगा और शूगर मिल की लाभ राशि पर भी असर पड़ेगा।

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