Home Breaking भाजपा ने किसानों का शहद रूपी खून चूसा, किसान की जेब पर डाला डाका- अभय चौटाला

भाजपा ने किसानों का शहद रूपी खून चूसा, किसान की जेब पर डाला डाका- अभय चौटाला

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Sahab Ram, Yuva Haryana
बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने कहा कि यह तो मुख्यमंत्री जी की बात में सच्चाई है कि ‘अगर मधुमक्खी फूल का रस नहीं चूसेगी तो शहद कहां से आएगा।’ पिछले पांच वर्षों में भाजपा की सरकार ने धान खरीद में घोटाला करके, फसल बीमा योजना द्वारा किसानों की जेब पर डाका और कृषि उत्पादन वस्तुओं के उचित भाव न देकर किसानों का शहद रूपी खून चूसने का काम किया है। बजट सरकार का एक विजन होता है जिससे पता चलता है कि सरकार आम जनता की भलाई के लिए योजनाएं किस ढंग से लागू करेगी।
इनेलो नेता ने कहा कि कहने को तो अन्नदाता की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया गया है परंतु सरकार ने इस बाबत ऐसे किसी रोड मैप का वर्णन नहीं किया जिससे पता चल सके कि उसकी नीतियों और नीयत में स्पष्टता दिखाई दे। बजट में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, परिवार समृद्धि योजना, अटल भू-जल योजना और मिट्टी का हैल्थ कार्ड आदि का विवरण करने मात्र से ही किसानों की आमदनी दुगुनी नहीं होगी। फसल बीमा योजना पहले ही फेल हो चुकी है, परिवार समृद्धि योजना पर इतनी शर्तों का लबादा है जो किसान पूरी ही नहीं कर पाएंगे।
अटल भू-जल योजना हरियाणा में पहले ही मिट्टी की भेंट चढ़ चुकी है। सिंचाई साधनों का पहले से ही अभाव है। एसवाईएल नहर किसानों की जीवनरेखा है परंतु भाजपा व कांग्रेस की अनदेखी की वजह से अधूरी पड़ी है। दादूपुर-नलवी नहर योजना रद्द करने से किसानों को सिंचाई की समस्या बढ़ी है। अल्प बजट व प्राकृतिक खेती का मंत्र तो बहुत अच्छा है परंतु क्या किसानों की उत्पादन लागत इस से पूरी होगी?
उन्होंने कहा कि केवलमात्र योजनाओं का वर्णन करने से आमदनी नहीं बढ़ेगी, इसके लिए सरकार को चाहिए कि स्वामीनाथन रिपोर्ट की शर्तों के अनुसार किसानों की फसल के लागत मूल्य के अनुरूप समर्थन मूल्य निश्चित किए जाएं। भाजपा ने तो उच्चतम न्यायालय में लिख कर दिया है कि इस रिपोर्ट को लागू करना संभव नहीं है, तो इस हालत में आमदनी दुगुनी करने का और क्या फार्मूला है। भू-जल नीचे गिरता जा रहा है अगर किसान धान के अलावा किसी अन्य फसल की बिजाई करे तो क्या सरकार उसे समर्थन मूल्य पर खरीदेेगी? बागवानी के लिए सुविधाओं की कमी है और बेचने के लिए मंडी की उचित व्यवस्था नहीं है। बजट में की गई घोषणाएं कोई नई नहीं हैं, यह तो पहले से ही लागू हैं परंतु उनको लागू करने के लिए नीयत साफ होनी चाहिए। केवल घोषणाओं से किसानों की आय दुगुनी होना संभव नहीं लग रहा।
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