श्रीनगर घुमने गए युवक को सेना देख चढ़ा देशभक्ति का ऐसा जुनून, बदल लिया जीवन का उद्देश्य

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Yuva Haryana,

Jind, 22 Feb,2019

हापुड़ के रहने वाले अभिषेक को जींद में कैप्टन पवन खटकड़ के तीसरे शहादत दिवस मनाये जाने का पता चलते ही बाइक लेकर हापुड़ से जींद के लिए चल दिए। चार घंटे में जींद पहुंच गए। अभिषेक ने सीआरएसयू में शहीद कैप्टन पवन के प्रतिमा स्थल से उसके पिता राजबीर के हाथों से मिट्टी ली।

ऐसा अभिषेक पहली बार नहीं कर रहे, दरअसल अभिषेक पर देशभक्ति का जुनून सवार है।  अभिषेक एमबीए कर चुके हैं और पेशे से इंटीरियर डिजाइनर हैं। बाइक पर हजारों किलोमीटर का सफर तय चुके हैं। देश के सभी धाम और ज्योर्तिलिंग देख चुके हैं। खुद सेना में भर्ती नहीं हुए, लेकिन देश व सेना के प्रति लोगों में प्यार जगाने का बेड़ा उठाया हुआ है।

सेना के प्रति अभिषेक के दिल में इतनी दीवानगी है कि अपनी पीठ पर कारगिल के 559 शहीदों के नाम नाम गुदवा लिए हैं। जींद के कैप्टन पवन सहित 33 और शहीदों के नाम भी लिखवाए हैं। अमर जवान ज्योति व इंडिया गेट सहित देश के 11 महापुरुषों के टैटू भी बनवा लिए हैं।

अभिषेक में यह जुनून कैसे पैदा हुआ पुछने पर अभिषेक कहते हैं कि एक बार वो दोस्तों के साथ श्रीनगर गया हुआ था। एक दोस्त खाई में गिर गया तो सेना ने उनकी काफी मदद की। लेह लद्दाख में मोबाइल नेटवर्क न होने से घर वालों से बात नहीं हो पाई, जिससे बेचैनी बढ़ गई। तब वहां फौजियों से बात हुई तो पता चला कि उनकी महीनों तक बात नहीं हो पाती। बस यहीं से जिंदगी का उद्देश्य बदल गया। दिल से आवाज निकली कि सैनिकों के लिए ही कुछ किया जाए।

सोचा आजकल टैटू, सिंबल ऑफ लव बन चुका है। मुझे सैनिकों से प्यार हो गया था, इसलिए सभी कारगिल शहीदों के नाम लिखवा लिए। अब हर रोज किसी न किसी शहीद परिवार से मिलता हूं।

अभिषेक गौतम ने बताया कि वह अब तक 80 शहीदों के परिवारों से मिल चुके हैं। उनके घर से भी मिट्टी लेकर आता हूं। अभिषेक 7 जून से आल इंडिया राइड शुरू कर रहे हैं। देश के हर राज्य में जाकर और शहीद सैनिकों के परिवारों से मिट्टी इकट्ठी करेंगे। उनकी इच्छा है कि इस मिट्टी के साथ कोई ऐसी चीज बनाई जाए, जिस पर पूरा देश गर्व कर सके। यह एक सैनिक की न होकर पूरे देश के सभी जवानों के लिए होगी।

अभिषेक कहते हैं कि सेना से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं, श्रीनगर में जवानों के हाथ में आटोमैटिक गन होती है, लोग उन पर पत्थर बरसाते हैं फिर भी वे शांत रहते हैं। इससे बड़ी सहनशीलता की मिसाल नहीं हो सकती। जबकि आम लोग सड़क पर चलते-चलते छोटी सी बात पर भिड़ जाते हैं।

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