सीनियर एडवोकेट हत्या मामला, 7 दोषियों को उम्रकैद के साथ 55-55 हजार जुर्माना

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Yuva Haryana

20 Oct,2019

हिसार। बता दें कि करीब ढाई साल पहले 24 जनवरी 2017 में टाउन पार्क के समीप वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष गुप्ता की बेरहमी से हत्या हुई थी। इस वारदात का मास्टर माइंड अधिवक्ता का समधी पवन बंसल था। वारदात के बाद आरोपी भूमिगत हो गए थे लेकिन तत्कालीन आईजी ओपी सिंह ने स्पेशल टॉस्क फोर्स को केस की गुत्थी सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। चंद घंटों में एक-एक कर सभी आरोपी गिरफ्तार कर लिए थे। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश वेद प्रकाश सिरोही की अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष गुप्ता मर्डर केस में आरोपी गैस एजेंसी संचालक पवन बंसल (दिवंगत अधिवक्ता का समधी) समेत 7 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सभी पर 55-55 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया गया है, न देने की स्थिति में 1 साल अतिरिक्त जेल का फैसला सुनाया है।

पुलिस जांच में सामने आया था कि समधी पवन बंसल अपनी बेटी शालू के आंसुओं को देखकर गुस्से में था। पवन बंसल के पास नौकरी कर रहे नरेश मीरकां को भाई कहकर जब शालू रोई तो वह भी गुस्से में आ गया था। वारदात के लिए नई गैंग बना डाली थी। यह खुलासा पवन बंसल और नरेश मीरकां ने पुलिस की पूछताछ में किया था। पुलिस पूछताछ में पवन बंसल ने बताया था कि एडवाेकेट बंसल के एडवोकेट पुत्र के साथ बेटी शालू की शादी 27 नवंबर, 2009 को की थी। शादी के बाद वर्ष 2010 में एक दोहती भी हुई थी। सबकुछ ठीक चल रहा था।

बेटी को लेकर हुए झगड़े में समधी ने कराई एडवोकेट गुप्ता की हत्या

मामले के अनुसार कोर्ट से घर लौट रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष गुप्ता की हत्या का मास्टर माइंड उनका समधी रामपुरा मोहल्ला निवासी पवन बंसल निकला था। गुप्ता परिवार के साथ बंसल का चार महीने से बेटी को लेकर विवाद चल रहा था। ऐसे में बात काफी बढ़ गई थी, जिसके चलते पवन ने गुप्ता की हत्या करने की साजिश रची थी। वारदात के लिए बंसल व उसकी एजेंसी के कर्मचारियों ने लगातार अधिवक्ता की रैकी की थी। 24 जनवरी, 2017 को अधिवक्ता सुभाष गुप्ता दोपहर करीब पौने चार बजे कोर्ट से अपनी गाड़ी में सवार होकर घर जाने के लिए निकले थे। उनके साथ ड्राइवर था और वे पीछे वाली सीट पर बैठे थे। जब कैंप चौक से डाबड़ा पुल की तरफ जा रहे थे तब टाउन पार्क के समीप पेट्रोल पंप के सामने आरोपियों ने उनकी गाड़ी रुकवाकर ताबड़तोड़ तेजधार हथियार से सीने पर वार कर हत्या कर डाली थी। हत्या होने के बाद बंसल परिवार शोक जताने के लिए सिविल अस्पताल भी नहीं आया था, जिसके चलते उनके ऊपर शक हुआ था। गुप्ता के परिजनों को भी वारदात के पीछे पवन बंसल के होने का शक था, जोकि पुलिस जांच में सच साबित हुआ था।

दोषियों में अधिवक्ता के समधी रामपुरा मोहल्ला वासी पवन बंसल और उसकी गैस एजेंसी में काम करने वाले छह कर्मचारी मीरकां वासी नरेश, महावीर कॉलोनी वासी सुनील, कुलदीप, पवन उर्फ पांडा, विकास और सैनियान मोहल्ला वासी कुनाल शामिल हैं। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त गाड़ी एवं चाकू के टुकड़े बरामद किए थे।

मगर पिछले चार-पांच माह से स्थिति कुछ ज्यादा खराब हो गई थी, इसके कारण बेटी को अपने घर पर रखना पड़ा। बेटी अपने दुख को लेकर कई बार उसके सामने रोई। एक दिन नरेश भी घर आया था। उसे ससुराल में चल रहे विवाद का पता चला। बेटी ने उसको भाई कहा और फूट-फूटकर रोने लगी थी। बंसल ने बताया था कि नरेश उसका खास आदमी है और पारिवारिक संबंध है। इसके चलते नरेश को भी गुस्सा आ गया था। उसने वारदात में सुनील, कुलदीप, कुनाल, विकास आदि के साथ मिलकर हमले की साजिश बना ली थी। वारदात से करीब 10 दिन पहले गुप्ता व बंसल पक्ष की पंचायत हुई थी। उस दौरान भी तनातनी में बंसल ने पिस्तौल निकालकर तानी थी। तब मामला पारिवारिक होने पर रफा-दफा कर दिया था।

पवन बंसंल का अपराधिक रिकॉर्ड रहा है

शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष गुप्ता के हत्याकांड में दोषी ठहराए पवन बंसल का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। वह कई मामलों में जेल जा चुका है। बंसल अपनी स्वतंत्रता में किसी का दखल बर्दाश्त नहीं करता था। भौंकने पर उसने अपने कुत्तों को भी गोली मार दी थी। उसके खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत पुलिस मामला दर्ज हुआ था। पुलिस की मानें तो पवन बंसल व उसके दो भाइयों के खिलाफ हत्या का केस भी दर्ज हुआ था। वर्ष 2014 बंसल ब्रदर्स की ऑटो मोबाइल कंपनी पर कार्यरत दुर्जनपुर निवासी चालक सुरेश ने पगार मांगी थी तो उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। मृतक के भाई सुभाष ने तीनों बंसल बंधुओं पर केस दर्ज करवाया था।

 

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