रिश्तों में सियासत, वार्ड आरक्षित हुआ तो 15 दिन में बेटा ब्याह के बहु उतारी मैदान में

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Gourav Sagwal, Yuva Haryana

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हरियाणा में जब से राजनीति में पढ़ाई लिखाई का आगमन हुआ है तब से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ गई है। अब ऐसा ही मामला पार्षद को लेकर भी हिसार से सामने आया है।

हिसार में जैसे ही नगर निगम के चुनाव में सीट महिलाओं के लिए  आरक्षित हुई वैसे ही कई पार्षदों का राजनीतिक गणित गड़बड़ा गया है। यहां एक तिहाई वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए गए है। जिसके बाद हर कोई अपनी पत्नी या घर की महिला को मैदान में उतारने को तैयार है।

वहीं वार्ड नंबर 10 से मौजूदा पार्षद ने तो अपनी चौधर को बरकरार रखने के लिए 15 दिन के भीतर अपने बेटे के लिए पढ़ी लिखी पत्नी ढूंढ कर उसे मैदान में भी उतार दिया।

बता दें कि वार्ड नंबर 10 की सीट पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी जो अब अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित कर दी गई है।

वार्ड नंबर 10 के पार्षद अजीत सिंह ने यह तरीका जब निकाला जब उनकी खुद की पत्नी पढ़ी लिखी नही है, बेटा 12 वीं पास है और नौकरी करता है तो पार्षद साहब ने चौधर को जाते देख इसका तरीका निकाला। उन्होंने बहू पढ़ी लिखी ढूंढ ली और बेटे की शादी कर बहू को मैदान में उतार दिया।

बहू ममता रोहतक के कलानौर की है और 12 वीं के बाद ANM का कोर्स किया है। वहीं ममता का भी यही कहना है कि  वह अपने ससुर के सपनों को पूरा करेगी।

लेकिन जो भी हो जब से प्रदेश में राजनीति में शिक्षा की एन्ट्री हुई है तब से महिलाओं के सिर पर चौधर का ताज है।

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