Home Breaking एड्स ग्रस्त मासूम भाई और बहन को आखिरकार मिला सहारा, अंबाला में भटकने के बाद सोनीपत में रहने को मिली छत

एड्स ग्रस्त मासूम भाई और बहन को आखिरकार मिला सहारा, अंबाला में भटकने के बाद सोनीपत में रहने को मिली छत

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Yuva Haryana

Ambala,  26 March, 2019

एड्स ग्रस्त मां-बाप की मौत के बाद नाबालिग भाई-बहन छत के लिए तरस रहे थे। काफी भटकने के बाद इन दोनों एड्सग्रस्त बच्चों को सोनीपत में रहने के लिए छत मिल गई है। बीमारी का पता चलने के बाद दोनों भाई बहन को रिश्तेदारों ने भी साथ रखने से मना कर दिया था।

बता दें कि पंचकूला ओपन शेल्टर या बाल निकेतन के बाद बाल कल्‍याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने भी बच्चों को आश्रय देने से इन्कार कर दिया था। जिसके बाद सोनीपत के राई स्थित शेल्टर होम ने इन बच्चों को रहने के लिए शरण दी।

पिछले पांच दिनों से दोनों भाई-बहन नारायणगढ़ में एक निजी संस्था के पास रह रहे थे। सोमवार देर शाम को अंबाला सीडब्ल्यूसी ने दोनों को सोनीपत के राई स्थित शेल्टर होम के लिए रवाना कर दिया गया।

जहां पर इन दोनों का इलाज स्वास्थ्य विभाग की ओर से निशुल्क किया जाएगा।

दरअसल शहर निवासी एक दंपती पिछले कई सालों से एड्स बीमारी से ग्रस्त थे। इनके पास एक लड़का व लड़की थी, जांच के दौरान दोनों भाई-बहन भी इस बीमारी से ग्रस्त मिले।

इनका इलाज अंबाला शहर जिला नागरिक अस्पताल में ही चल रहा था। करीब छह महीने पहले पिता की मौत हो गई और गत 25 फरवरी को मां भी चल बसी।

बीमारी के चलते अन्य रिश्तेदारों ने दोनों भाई-बहनों को रखने से इन्कार कर दिया।

जिसके बाद दोनों बच्चे अंबेडकर संस्था के जरिए सीडब्ल्यूसी के पास पहुंचे। काउंसिलिंग के बाद इन्हें पंचकूला ओपन शेल्टर होम में भेजा गया। वहां संबंधित अधिकारियों ने इन्हें रखने से इन्कार कर दिया। सीडब्ल्यूसी ने दबाव बनाया तो लड़की को वहीं होम में रखा गया और उसके भाई को अंबाला में टीबी अस्पताल में दाखिल करवाया गया।

एक सप्‍ताह पहले टीम भाई-बहन को लेकर पंचकूला बाल निकेतन में पहुंची तो यहां भी उन्हें छत देने से इन्कार कर दिया।

कहीं भी छत नहीं मिली तो सीडब्ल्यूसी ने राज्य बाल सरंक्षण आयोग के अलावा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों से संपर्क किया।

जिसके बाद एक-एक कर अन्य विभागों के अधिकारी भी इस मामले में कूद पड़े। सोमवार को सोनीपत के राई स्थित सीडब्ल्यूसी से बात हुई और भाई-बहन को वहीं शेल्टर होम में शिफ्ट करने की बात हुई। इसके बाद सोनीपत सिविल सर्जन से बात की गई और बच्चों का इलाज वहीं करवाने की बात की गई। देर शाम सीडब्ल्यूसी टीम ने भाई-बहन को सोनीपत शिफ्ट करने के लिए भेज दिया गया है, जहां उनका निशुल्क इलाज किया जाएगा।

 

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