अजय लोहान अपनी सैलरी से सवारते हैं बच्चों की जिंदगी ,पढ़ाने का तरीका है सबसे अलग

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आपने हमेशा सरकारी अध्यापकों के लिए गलत विचार ही सुने होंगे लेकिन नारनौंद जिले के एक ऐसे अध्यापक है जो अपनी सैलरी से आज तक बहुत से बच्चों का भविष्य बनाते आये है।

बतादें की नारनौंद जिले के गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल में अंग्रेजी के टीचर अजय लोहान को हाल ही में ह्यूमन गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया है। अजय लोहान को उनके प्रयासों के लिए हरियाणा गौरव अवार्ड, बेस्ट स्टेट मोटिवेशन अवार्ड, बेस्ट टीचर अवार्ड, हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड, बेस्ट पार्लियामेंट आर्गेनाईजेशन अवार्ड व कक्षा तत्परता कार्यक्रम के तहत उत्कृष्ठ सेवाओं के लिए गोल्ड मेडल मिल चुका है।

अजय 7 बार बेस्ट टीचर अवार्ड जीत चुके हैं। ह्यूमन राइट्स राष्ट्रीय गौरव अवार्ड 2018 मिला है।अजय जिस स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहे है  उनके पिता भी उसी स्कूल में शिक्षक रह चुके हैं।पिता स्वर्गीय रामनिवास लोहान इसी स्कूल में राजनीती शास्त्र के प्राध्यापक रह चुके हैं।

वर्ष 2006-2007 में इस स्कूल में अंग्रेजी टीचर के तौर पर अजय लोहान ने ज्वॉइन किया था । तब से लेकर आज तक वे हर साल 10 लड़कियों की पढ़ाई लिखाई का जिम्मा उठाते हैं और सारा खर्चा देते हैं। हर एक शिक्षक का अपना एक तरीका होता है। जिससे की बच्चा सीखता है । इसी तरह अजय का भी पढ़ाने का एक अपना तरीका है ।

अजय लोहान दिल्ली की एकेडमी में अंग्रेजी सिखाते थे। उसी तरीके को यूज कर स्टूडेंट्स को शुरुआत में अंग्रेजी के बेसिक 10 शब्द सिखाते हैं। धीरे-धीरे एक पेज राइटिंग के लिए देते हैं। 5-5 शब्दों के मीनिंग बनवाते हैं ।

अजय लोहान ने पाबड़ा के नवोदय स्कूल से 1999 में 10वीं व 2001 में 12वीं की, इसके बाद जींद के सेंटर से बीएड की। बीएड करते ही अंग्रेजी टीचर की जॉब लगे। इसके बाद भी एम अंग्रेजी, एमफिल, मास कम्यूनिकेशन की। वहीं अंग्रेजी में पीएचडी भी कर रहे हैं।

अपने प्रयासों के चलते अजय बच्चों को कंपनी के हेड ऑफिस लेकर गए थे, उस दौरान बच्चों की प्रतिभा से प्रभावित होकर इंफोसिस ने 10 कंप्यूटर भी देने का फैसला लिया । अजय की बदौलत जिस स्कूल के बच्चे अंग्रेजी समझ भी नहीं पाते थे, अब वे अंग्रेजी में बात करते हैं।

स्कूल से 7 स्टूडेंट्स लेफ्टिनेंट बने हैं। तीन बच्चे आईआईटी व 6 पीएमटी में गए है। वहीं 116 स्टूडेंट्स दिल्ली व पंजाब की यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं।

 

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