आज हड़ताल का मिला जुला रहा असर, सड़कों पर दौड़ती रही बसें

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 08 Jan, 2018

केंद्र सरकार की कर्मचारी व मजदूर विरोधी नीतियों तथा प्रदेश सरकार की घोषणापत्र पर वायदाख़िलाफी के विरोध में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी फेडरेशन व केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर पंचकूला में सैंकड़ों कर्मचारी और मजदूर हड़ताल पर रहे और शहर में सरकार के खिलाफ रोष मार्च निकाला।

कर्मचारी देश भर में एनपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन बहाल करने के लिए सँघर्ष कर रहे हैं। मोदी सरकार इस पर चुप्पी साध मंदिर-मस्जिद की बात कर रही है। सरकारी विभागों का निजीकरण, श्रम कानून मालिकों के हक में बदले जा रहे हैं। बैंकों व जनकल्याण के महकमों की मरजिंग कर रोजगार के अवसर खत्म कर दिए हैं। अप्रेंटिस व सक्षम के नाम पर युवाओं का मुट्ठी भर मानदेय में शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वास्तव में अगर किसी के अच्छे दिन आए हैं तो वह कार्पोरेट्स घरानों के आए हैं जिनके करोड़ों रूपये के जहां टैक्स माफ कर दिए गए हैं वहीं सरकारी बैंकों से लिए गए भारी भरकम कर्ज माफ कर दिए गए हैं।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि केंद्र के नक्शे कदम पर ही चलते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार ने भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए वायदों कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, पंजाब के समान वेतनमान लागू करने, ठेका प्रथा पर रोक लगाने व न्यूनतम 15 हज़ार रुपए वेतन देने से भी पीछे हट गई है। 31 मई 2018 के हाईकोर्ट के फैसले पर विधानसभा में रेगुलराइजेशन एक्ट बनाने का वायदा करके साफ मुकरना और फिर सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेकर मामले को लम्बा खींच कर 4654 प्रभावित कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

7वें वेतन आयोग अनुसार जनवरी 2016 से मकान किराया भत्ता का भुगतान न करके कर्मचारियों का करोड़ों रुपया सरकार अपने प्रचार के विज्ञापनों पर खर्च कर रही है। ठेका प्रथा को रोड़वेज सहित सभी जन सेवाओं के महकमों में जोर शोर से लागू कर ठेकेदारों को मालामाल किया किया जा रहा है। विरोध करने पर एस्मा के तहत कर्मचारियों पर मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकारों की जनविरोधी व कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ कर्मचारी व मजदूर तथा परियोजना वर्कर की ये हड़ताल सरकार को सीधी चेतावनी है कि जनता व कर्मचारियों से किए गए वायदों को पूरा करो वरना गद्दी छोड़ो।

मुख्य मांगे:-
*रोडवेज सहित सभी सरकारी विभागों के निजीकरण व ठेका प्रथा पर रोक लगाई जाए।
*पुरानी पेंशन व एक्सग्रेसिया रोजगार नीति बहाल की जाए।
*सभी कच्चे कर्मियों को कानून बनाकर पक्का किया जाए व हाईकोर्ट के फैसले से प्रभावित 4654 प्रभावित कर्मियों को सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।
*पंजाब के समान वेतनमान लागू किया जाए।
*जनवरी 2016 से बकाया सहित मकान किराया भत्ता का भुगतान किया जाए।
*वास्तविक खर्च पर आधारित कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू की जाए।
*आशा वर्कर, मिड डे मील व आंगनवाड़ी वर्कर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन दिया जाए।
*अप्रेंटिस व सक्षम को नियमित रोजगार की गारंटी दी जाए।
* सभी मजदूरों को 5 हजार रुपए न्युनतम पैंशन दी जाए।

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