अंबाला-जगाधरी रोड पर किसान को 68 साल की लड़ाई के बाद मिला कब्जा, अब JCB लेकर पहुंचे खुदाई करवाने

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Shweta Kushwaha, Yuva Haryana

Jagadhari, 10 Dec, 2018

अम्बाला से जगाधरी रोड दिनांक 8 दिसंबर से बंद हो गई है। गांव हरिपुर जट्टान के किसान कश्मीर सिंह ढिल्लो के मुताबिक सरकार ने उनकी जमीन पर सन् 1951 में कब्जा करके (अम्बाला- जगाधरी) रोड बनाई थी। जो कचरा प्लांट कैल से हरिपुर जट्टान मोड़ तक उसकी जमीन मे बनायी गई थी।

जिसे किसान ने सैशन कोर्ट जगाधरी के आदेश से लम्बी लड़ाई के बाद JCB से सड़क खुदवाकर अपनी जमीन का कब्जा ले लिया। जिससे जगाधरी-अम्बाला रोड बंद हो गया है। जमींदार को सरकार के साथ-साथ अफसरों ने बहुत मनाने का प्रयास किया व इस जमीन के बदले और जमीन देने की भी पेशकश की। लेकिन जमींदार नहीं माना। अब यमुनानगर से अम्बाला-चंडीगढ़ जाने के लिए कमानी चोंक यमुनानगर से सुढैल के रास्ते हाईवे से होकर ही अम्बाला चंडीगढ़ जाना होगा।

शनिवार को किसान कश्मीरी सिंह ढिल्लो ने रोड के दोनों तरफ ट्रैक्टर- ट्राली लगवाकर खुदवाई शुरू कर दी। इसके बाद PWD विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जिला उपायुक्त से किसान की बात करवाई। डीसी ने किसान से दो दिन का समय मांगा था, जिसके बाद किसान ने काम रुकवाया।

किसान कश्मीरी का कहना है कि उनके परिवार के पास काफी जमीन हैं और पहले जमीन पर जंगल था। जमीन के रास्ते से कच्चा रास्ता निकल रहा था। 1951 में सरकार द्वारा कच्चे रास्ते पर रोड बना दिया गया। तब यह PWD के अंडर था और रोड बनने के बाद इसे नेशनल हाईवे ही घोषित कर दिया गया था।

पिता और चाचा ने सरकार को काफी पत्र लिखे कि सड़क हमारी जमीन पर बनी हुई है, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। आखिरकार 2000 में चाचा कोर्ट गए और केस दर्ज करवाया। सेशन कोर्ट ने 2016 में हमारे हक में फैसला सुनाया था, लेकिन इस फैसले के खिलाफ सरकार ने रिव्यू पिटिशन लगाई थी।

लेकिन कोर्ट ने फैसला नहीं बदला और अफसरों ने जमीन के बदले कई और दूसरी जमीन भी देने का ऑफर किया। इस फैसले को लागू करने के लिए सुनील कुमार की कोर्ट में दो साल सुनवाई भी चली। किसान का कहना है कि सरकार ने कब्जा नहीं दिया, अब हम कब्जा लेंगे और 70 साल तक हमारी जमीन इस्तेमाल भी की। अब हम जमीन के मुआवजे के लिए लड़ेंगे।

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