RTI में बड़ा खुलासा, नोटबंदी में जिस सरकारी में सबसे ज्यादा पैसा जमा, उसके निदेशक अमित शाह

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भारत में साल 2016 के नंवबर 8 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 500 दी 1000 के नोट बंद करने का बड़ा फैसला लिया था। उसी दिन से पूरे देश में पुराने नोट पूरी तरह से बैन थे। जिसके बाद सारा देश बैंको की लाईन में नोट बदलवाने के लिए लगा था।

लेकिन The Economic Times की एक खबर के अनुसार RTI से खुलासा हुआ है कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह जिस बैंक के निदेशक रहे हैं वह बैंक नोटबंदी के दौरान सबसे ज्यादा बंद 500 और 1000 के नोट जमा करने वाला जिला सहकारी बैंक है। यानि की चलन से बाहर हो चुके 500 और 1000 के नोट सबसे ज्यादा उस बैंक में वापिस जमा होकर बदले गए जिसके निदेशक अमित शाह थे।

मुंबई के रहने वाले एक आरटीआई कार्यकर्ता को RTI से जानकारी मिली है कि अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक (एडीसीबी) ने नोटबंदी की घोषणा के महज पांच दिन के भीतर 745.59 करोड़ के बंद हुए नोट लिए थे।

बता दें कि नोटबंदी की घोषणा के महज पांच दिन बाद ही सभी जिला सहकारी बैंकों को लोगों से 500 और 1000 के नोट लेने से मना कर दिया था। इसका कारण ये बताया जा रहा है कि सहकारी बैंकों के जरिए ही काले धन को सफेद किया जा सकता है।बताया जा रहा है कि  अमित शाह सन् 2000 में बैंक के अध्यक्ष भी रहे हैं।

 

Patna: People queue up at an ATM in Patna on Saturday. PTI photo(PTI11_12_2016_000098B)

बता दें कि जिस एडीसीबी के पास 31 मार्च 2017 को कुल 5,050 करोड़ रुपये जमा थे उसके बाद सबसे ज्यादा बंद नोट जमा करने वाला सहकारी बैंक राजकोट जिला सहकारी बैंक है जिसके अध्यक्ष गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की सरकार में कैबिनेट मंत्री जयेशभाई विट्ठलभाई रडाड़िया हैं। इस बैंक ने 693.19 करोड़ रुपये नोट जमा किए थे।

मुबई वासी आरटीआई कार्यकर्ता मनोरंजन एस रॉय ने के अनुसार नोटबंदी के बाद पहली बार राज्य सहकारी बैंकों और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में जमा पैसे की जानकारी का खुलासा आरटीआई से हुआ है। वहीं आरटीआई में जानकारी मुख्य महाप्रबंधक और अपीलय प्राधिकारी और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के एस. सर्वानवल द्वारा दी गई है।

 

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