भारतीय अर्थशास्त्रियों ने पाया तेल की कीमतों का तोड़, डाटा खरीद कर पेट्रोल की कीमत को दो मात

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@Surender Dahiya

#डाटा खरीदो पेट्रोल की कीमतों को मात दो#

लो भारतीय “अर्थशास्त्रीयों” ने बढ़ती तेल की कीमतों का तोड़ पा लिया है।
अब आपको तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान होने की आवश्यकता नहीं।
ये अर्थशास्त्री प्रो मार्शल, लार्ड केन्स, अमृत्य सेन तो कुछ भी नहीं इनके आगे। वो तो वैसे ही डिमांड और सप्लाई के सिद्धांत में ही पूरे अर्थशास्त्र को उलझाए रहे। लार्ड केन्स भी बचत, निवेश, रोजगार के चक्रव्यूह में पड़े रहे।
हमारे “नागपुरी अर्थशास्त्रियों” ने सीधा सा मंत्र दे दिया है कि हर रुपये 10 प्रति लीटर पेट्रोल में बढ़ोतरी पर 10 जीबी डेटा खरीद लो उससे जो पैसे बचेंगे उससे तेल की बढ़ी कीमतें nul एंड voide हो जाएंगी।
तेल रु 80 प्रति लीटर हो तो 30 जीबी डेटा ले लो, रु 90 हो तो 40 जीबी ले लो, रु 100 हो तो 50 जीबी ले लो।
अब आप कहोगे की इतना तो डेटा यूज़ ही नहीं होता। बिल्कुल आपकी बात ठीक है। मैं सारा दिन इस मोबाइल की रेल बनाये रहूं सूं फिर भी 10 जीबी डेटा नहीं लगता।
अब आप कहोगे की जब इतना डेटा लगता नहीं तो खरीदना क्यों। तो भाई जी बात ऐसी है कि अगर तेल खरीदने के लिए पैसे बचाने हैं तो खरीदना पड़ेगा लगे या ना लगे।
जैसे हिसाब में मानते हैं ना कि माना मूलधन सौ वैसे ही ये मानना पड़ेगा कि उतना डेटा यूज़ हो रहा है वर्ना भुगतो बढ़ती तेल की कीमतों से।
अब आप फिर कंफ्यूजिया गए होंगे कि जो डेटा यूज़ करते ही नहीं उनका क्या।
किसान जो सिंचाई के लिए इंजिन में डीज़ल डालता है, ट्रेक्टर को खेत जोतने के लिए डीज़ल डालता है वो तो एक जीबी डेटा भी यूज़ नहीं करता।
एक ऑटो रिक्शा वाला डीज़ल डाल कर सारा दिन धूप, आंधी, बारिस में धक्के खा कर बमुश्किल पेट पालने का जुगाड़ कर पाता है।
एक कार वाला बैंक से लोन लेकर उसको टैक्सी के रूप में चलाता है बढ़ते डीज़ल की मार तो उसको भी पड़ती होगी वो बेचारा भी श्याद कुछ जीबी डेटा यूज़ करता हो।
एक छोटा कैंटर या अन्य वाहन लेकर माल ढुलाई करके बैंक के लोन की किश्त भरता है और परिवार का गुजर बसर करता है डेटा तो वो भी नहीं खरीदता।
तो भैया बात ऐसी है कि ये सब इनकी प्राथमिकता में नहीं हैं
इनकी प्राथमिकता में डेटा यूज़ करने वाले हैं उनका समाधान कर दिया ये अपने आप सोच लेंगे।
वैसे इनके बारे में कभी किसी ने सोची भी है जो अब सोचें।

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