आंगनबाड़ी वर्कर्स ने सरकार पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप, 29 अप्रैल को होगा फिर से आंदोलन

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Indervesh Duhan, Yuva Haryana,

Bhiwani, (16 April 2018)

प्रदेश सरकार के खजाने से पैसा लेने वाले विभिन्न कर्मचारी समय-समय पर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल और प्रदर्शन करते हैं, जिसके बाद प्रदेश सरकार प्रदर्शन के आगे झुककर बातचीत का रास्ता अपनाती है और कर्मचारियों की मांग मान लेने के बाद धरना प्रदर्शन समाप्त हो जाता है।

परन्तु बहुत कम मामलों में प्रदेश सरकार मानी गई मांगों को लागू करने का काम करती है। इसी तरह पिछले एक माह से चलते आए आंगनबाड़ी वर्कर्स और हैल्पर्स के धरने-प्रदर्शन के बाद 10 मार्च को मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी वर्कर्स और हैल्पर्स की 12 सूत्रीय मांगों पर सहमति जताई थी।

जिसके बाद हर जिला मुख्यालय पर इनकी हड़ताल समाप्त हो गई थी। इन मांगों को पूरा करने के लिए नोटिफिकेशन लागू न होने को लेकर आज फिर से आंगनबाड़ी वर्कर्स और हैल्पर्स सरकार के खिलाफ नारे लगाती हुई नजर आई।

आंगनबाड़ी वर्कर्स और हैल्पर्स यूनियन की सदस्य कंचन और कामरेड ओमप्रकाश ने बताया कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली थी लेकिन कुशल आंगनबाड़ी वर्कर्स को 11 हजार 429 रूपये एवं अकुशल आंगनबाड़ी वर्कर्स को 10 हजार 286 रूपये,  हैल्पर्स का मानदेय बढ़ाने, आंगनबाड़ी के संचालन के लिए बड़े शहरों में 5 हजार, छोटे शहरों मेे 3 हजार और गांवों में 750 रूपये देने, काम के दौरान वर्कर्स और हैल्पर्स की मृत्यु होने पर आश्रित को तीन लाख रूपये मुआवजा देने आदि 12 सूत्रीय मांगों पर सहमति बनी थी, परन्तु सहमति के बावजूद सरकार इन मांगों को पूरा नहीं कर रही।

इसीलिए वह प्रदर्शन कर उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप रहे हैं। यदि उनकी मांगें पूरा करने का नोटिफिकेशन जल्द जारी नहीं किया गया तो 29 अप्रैल को जींद में राज्य स्तरीय रैली कर अपने आंदोलन को फिर से तेज करने का काम करेंगी।

बता दें कि चुनाव के नजदीक आने के साथ ही प्रदेश सरकार विभिन्न कर्मचारी संगठनों के धरने-प्रदर्शनों से जूझ रही है। बातचीत के माध्यम से सरकार इनकी मांगें मानकर धरने तो खत्म करवा देती है, परन्तु इन्हे लागू करने में कोताही बरती जाती है। जिसके विरोध में संगठन दोबारा से प्रदर्शन करते नजर आते हैं।

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