हरियाणा में 486 करोड़ की लागत से बनेगा बागवानी विश्वविधालय, चार जिलों में स्थापित होंगे क्षेत्रिय केंद्र

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 20 July, 2018

हरियाणा में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए खेत के पास ही उत्पाद की ग्रेडिंग व उसके प्रमाणीकरण हेतू ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी का गठन किया जाएगा ताकि बाजार में पहुंचने वाले जैविक उत्पादों की विश्वसनीयता बनी रहे।

 यह निर्णय आज यहां हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आयोजित विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। बैठक में हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी का गठन करें और यह एजेंसी खेती के स्त्रोत तक जाकर जैविक उत्पादों का प्रमाणीकरण करेगी ताकि बाजार में उपभोक्ताओं का विश्वास उस उत्पाद के प्रति रहे कि यह उत्पाद पूर्ण रूप से जैविक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक खेती के लिए हमें एक तंत्र बनाना होगा और इसके साथ-साथ किसानों को प्रेरित करना होगा कि वे जैविक खेती को अपनायें।

 बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि कुरुक्षेत्र के गुरुकुल में किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए बनाया जा रहा संस्थान मार्च 2019 तक पूर्ण हो जाएगा और उसके बाद वहां पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि राज्य के 11 जिलों में 20 कलस्टर बनाये गए हैं जिसमें 674 किसान जैविक खेती कर रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक निर्धारित लक्ष्य रखें।

बैठक में बागवानी विश्वविद्यालय पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस विश्वविद्यालय के तहत 4 क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किये जाने हैं, जिसमें से एक जींद में, एक अंबाला में, एक झज्जर में तथा एक सिरसा में बनाया जाना है। बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 486 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

बैठक में सिंचाई से संबंधित विषय पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री को बताया गया कि सूक्ष्म सिंचाई का क्षेत्र बढ़ रहा है और इस योजना के प्रति किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री को विभिन्न नहरों और टेलों तक पानी पहुंचने की जानकारी भी दी गई। जिस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन टेलों में पानी पहुंचा है और जिन नहरों की क्षमता बढ़ी है वह कार्य लगातार चलता रहना चाहिए। उन्होने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सूक्ष्म सिंचाई के प्रति किसानों में प्रतिस्पर्धा पैदा की जाए ताकि वे बढ़-चढ़ कर इस सिंचाई प्रणाली को अपनाए जिससे पानी की बचत होगी। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिये कि वे सूक्ष्म सिंचाई का डाटा तैयार और यह डाटा उनके डैशबोर्ड पर भी डाली जाए।

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