बहादुरगढ़ का अंकुर कौशिक बना आईएएस, ऑल इंडिया में हासिल किया 37वां रैंक

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Pradeep Dhankhar, Yuva Haryana

Bahadurgarh, 6 April, 2019

बहादुरगढ़ का होनहार अंकुर आईएएस बन गया है। यूपीएससी की परीक्षा में अंकुर ने ऑल इंडिया में 37वां रैंक हासिल किया है। बेहद ही हंसमुख, मिलनसार और शरारती स्वभाव का अंकुर फिलहाल उदयपुर में भारतीय रेल में सेवायें दे रहा है। साल 2016 की यूपीएससी की परीक्षा में अंकुर को 485 वां रैंक मिला था। लेकिन अंकुर के मन में डीसी बनने का जुनून था और आखिरकार उसने अपना सपना पूरा करते हुये देशभर में 37 वां रैंक हासिल किया है।

अंकुर के आईएएस बनने की सूचना मिलते ही माता- पिता बेहद भावुक हो गये। मां ने तो खुशी में जमकर आंसू भी बहाये। माता पिता का कहना है कि उनका बेटा आईएएस रहते हुये कभी रिश्वत नही लेगा और हमेशा गरीबों की सेवा करेगा।

अंकुर की मां गीता ने बताया कि अंकुर ने बहादुरगढ़ के बाल भारती स्कूल से 12वीं की कक्षा पास की। फिर द्वारका से बीटेक किया और उसके बाद सीजीएल की परीक्षा पास कर कस्टम विभाग में एग्जामिनर के तौर पर चयन हुआ। मुम्बई में तीन महीने कस्टम की नौकरी भी की, फिर 2016 में यूपीएससी की परीक्षा में 485 वां रैंक आने के बाद भारतीय रेल सेवा में शामिल हो गया।

भारतीय रेल से एक साल विदाउट पे छुट्टी लेकर आईएएस की तैयारी की और अपना सपना पूरा भी कर लिया। अुंकर की मां ने कहा कि उसका बेटा हंसमुख और शरारती भी है, लेकिन बेहद साधा है।

अंकुर की पिता की खुशी का भी ठिकाना नहीं है। उन्होंने बताया कि बचपन में अंकुर अच्छा डांस करता था। एक बार डीएसपी सुमन मंजरी ने अच्छा डांस करने पर उसकी पीठ थपथपाई थी और कहा था कि ये लड़का एकदिन बहुत बड़ा बनेगा और आज उसने वो कर दिखाया है। अंकुर के पिता सुभाश का कहना है कि आज वो बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि अंकुर वो बेटा ,है जिसने कभी अपने माता- पिता से कोई बड़ी डिमांड नहीं की। प्राईवेट नौकरी करते हुये उन्होंने अपनी बड़ी बेटी और बेटे को अच्छे स्कूल में पढ़ाया। अंकुर जूनुनी है और जो सोचता है वो करके ही रहता है।

अंकुर पढ़ाई के सा-थ साथ सबके साथ घुलमिलकर रहता था। मां कहती कि पढ़ ले बेटा, तो कहता है मैं पढ़ लूंगा मां, चिंता मत कर। मंदिर जाने के लिये मां कहती, तो कहता मां तुम और पापा मंदिर जाओ और प्रार्थना करों, मैं पढ़ाई करता हूं। अंकुर के पिता ने बताया कि उसे अंग्रेजी के नोवल पढ़ना और कविता लिखना पसंद है। लीलीज एंड ग्रेवज नाम से अंकुर ने 2016 में कविताओं की एक किताब भी लिखी थी।

बेटे के आईएएस बनने की खुशी में माता- पिता ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर भी बधाई दी। पड़ोसी, रिश्तेदार सब बधाई देने के लिये अंकुर के घर आ रहे हैं। अंकुर के माता- पिता का कहना है कि उन्होंने अक्सर देखा की अधिकारी लोगों के चक्कर कटाते हैं और काम नही करते, इसलिये वो चाहते हैं कि उनका बेटा अच्छा काम करे, सबकी सेवा करे और गरीबों के कल्याण के लिये काम करे।

अंकुर कौशिक फिलहाल उदयपुर में हैं और जैसे की बहादुरगढ़ में आयेगा, तो यंहा उसका जोरदार स्वागत भी किया जायेगा। अंकुर की उपलब्धि ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि अगर आपका इरादा पक्का है और आप उसे हासिल करने के लिये सही नीयत से सच्चे मन और लग्न से प्रयास करते ,हैं तो मंजिल हासिल हो ही जाती है।

 

 

 

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