बेरी का माता भीमेश्वरी मंदिर अब मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले बोर्ड के अधीन, सब कमाई-खर्च का अधिकार बोर्ड को

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Yuva Haryana, Chandigarh

झज्जर जिले के बेरी कस्बे में स्थित माता भीमेश्वरी देवी मंदिर के प्रबंधन के लिए सरकार ने बोर्ड गठित करने का फैसला लिया है। बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री, उपाध्यक्ष लोकल बोडीज मंत्री होंगे। बोर्ड में इनके अलावा 3 अधिकारी और 9 विशिष्ठ व्यक्ति भी इसके सदस्य होंगे।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में श्री माता भीमेश्वरी देवी मंदिर(आश्रम), बेरी पूजा स्थल और पूजा स्थल से सम्बद्घ या अनुलग्न भूमियों और भवनों सहित उसके विन्यासों के बेहतर प्रबंधन, प्रशासन और अभिशासन के लिए हरियाणा माता भीमेश्वरी देवी मंदिर(आश्रम), बेरी पूजा स्थल अधिनियम,2018 को स्वीकृति प्रदान की गई।

इस अधिनियम के लागू होने से पूजा स्थल कोष का स्वामित्व बोर्ड के पास रहेगा और यह बोर्ड इसके स्वामित्व प्रशासन और उपयोग का हकदार होगा। मुख्यमंत्री इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे जबकि स्थानीय शासन विभाग के मंत्री इसके उपाध्यक्ष होंगे।

स्थानीय शासन विभाग के सचिव या स्थानीय शासन विभाग के वित्तायुक्त या आयुक्त, जैसे भी स्थिति हो, इसके पदेन सदस्य होंगे। उपायुक्त, झज्जर इसके पदेन सदस्य सचिव तथा उपमंडल अधिकारी (नागरिक)इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे।

सरकार द्वारा नौ व्यक्तियों को सदस्य के रूप में मनोनीत किया जाएगा जिनमें दो ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्होंने सरकार के विचार में हिन्दू धर्म या संस्कृति की सेवा में प्रतिष्ठा हासिल की है, दो ऐसी महिलाएं जिन्होंने सरकार के विचार में हिन्दू धर्म या संस्कृति की सेवा या सार्वजनिक कार्य में, विशेषकर महिलाओं की उन्नति के संबंध में प्रतिष्ठा हासिल की है और तीन व्यक्ति जिन्होंने प्रशासन, कानूनी मामलों या वित्तीय मामलों में प्रतिष्ठा हासिल की है।

पूजा स्थल निधियों का उपयोग मंदिर की उचित देखभाल, पूजा तथा अन्य कर्मकाण्ड करने के लिए व्यय चुकाने, दर्शनार्थ आए श्रद्घालुओं को जन सुविधाएं, सुविधाएं उपलब्ध करवाने, शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना और रखरखाव, विद्यार्थियों के प्रशिक्षण और पूजा स्थल में दर्शनार्थ आए अनुयायियों, तीर्थ यात्रियों और उपासकों का स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।

बोर्ड आवश्यकतानुसार मुख्य प्रशासक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और ऐसे अन्य अधिकारी नियुक्त कर सकता है। एक बार मूर्तियों पर चढ़ाए जाने के बाद किसी भी आभूषण या गहने या गैर-विनाशशील प्रकृति की किसी भी अन्य मूल्यवान सम्पत्ति का, बोर्ड की सिफारिश पर सरकार  की पूर्व स्वीकृति के बिना विनिमय, विक्रय या निपटान नहीं किया जाएगा। बोर्ड के स्वामित्व वाली किसी भूमि या अन्य अचल सम्पत्ति को बोर्ड के प्रस्ताव और सरकार की स्वीकृति के बिना अलग नहीं किया जाएगा।

यह बोर्ड मंदिर में पूजा की उचित व्यवस्था करेगा, श्रद्घालूओं को पूजा के लिए सुविधाएं मुहैया करवाएगा, मंदिर की बहुमूल्य प्रतिभूतियों और आभूषणों  की सुरक्षा, अभिरक्षा व परिरक्षण सुनिश्चित करेगा।

बोर्ड तीर्थ यात्रियों और उपासकों की भलाई के लिए सुविधाएं सुनिश्चित करेगा जिसमें उनके आवास हेतु भवनों का निर्माण, साफ- सफाई की व्यवस्था और संचार व परिवहन साधनों का सुधार करना, मंदिर में और इसके आस-पास विकास कार्य शुरू करना, धार्मिक और सामान्य शिक्षा प्रदान करने के लिए उचित प्रबंध करना, उपासकों या तीर्थ यात्रियों के लिए चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करना तथा ऐसी सभी व्यवस्थाएं करना शामिल है जो पूजा स्थल, मंदिर की परि-सम्पत्तियों और तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए कुशल प्रबंधन, देखभाल और प्रशासन से संबंधित या उसमें सहायक हों।

मंदिर के ऐसे सभी कर्मचारियों, जो पूजा स्थल से सम्बद्घ किसी कार्य पर लगाए जाते हैं, को इस अधिनियम के लागू होने से बोर्ड के कर्मचारी समझा जाएगा जब तक कि वे किसी अन्य विकल्प का चुनाव नहीं करते और वे बोर्ड के प्रशासनिक तथा अनुशासनात्मक नियंत्रण में रहेंगे।

उनके सेवा नियम और प्रबंधन इस अधिनियिम के तहत नियमों द्वारा नियंत्रित होंगे। उनका वेतन यथासंभव उनकी वर्तमान सेवा के वेतन से कम नहीं होगा। दुकानदार और पट्टेदार, जो इस पूजा स्थल के किराएदार हैं, बोर्ड के किराएदार समझे जाएंगे।

श्री माता भीमेश्वरी देवी मंदिर(आश्रम), बेरी एक प्राचीन मंदिर है। हरियाणा तथा पड़ौसी राज्यों से लगभग 5 से छ: लाख श्रद्धालु माता के दर्शनों हेतु प्रतिवर्ष इस मंदिर में आते हैं। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्घालु माता के दर्शनों हेतु आते हैं। बेरी स्थित  भीमेश्वरी देवी माता मंदिर में नवरात्रों के दौरान प्रतिवर्ष दो बड़े मेले लगते हैं।

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