हरियाणा के 50 हजार कच्चे कर्मचारियों को फौरी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने बचाई नौकरी

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Yuva Haryana

Delhi, 27 Nov, 2018

हरियाणा में पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले से प्रभावित 4654 कर्मचारियों के साथ साथ करीब 50 हजार अस्थायी कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट ने फौरी राहत दी है, सोमवार को सुनवाई के दौरान माननीय कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद हुड्डा सरकार की नियमतिकरण की पॉलिसी से प्रभावित कर्मचारियों को राहत मिली है। हाई कोर्ट ने 30 नम्वबर तक इन सभी कर्मचारियों को निकालने का आदेश दे रखा था और पक्की भर्ती करने के आदेश दिया था।

पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के इस फैसले को छह सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट में की ओर से चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस विनीत शरन की खंडपीठ ने नोटिस जारी करते हुए अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि इससे पहले सरकार पर इस कर्मचारियों की नौकरी बचाने के लिए विधानसभा में अध्यादेश लाने का दबाव था, जिसका ड्राफ्ट सरकार ने बनाकर कर्मचारियों को सौंप दिया था।

अब सर्व कर्मचारी संघ की तरफ से कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से फौरी राहत मिल गई है लेकिन सरकार अध्यादेश लाकर कर्मचारियों की नौकरी बचाने का काम करें।

हाईकोर्ट ने 31 मई 2018 को फैसला दिया था कि नियमित किए गए 4,645 कर्मचारियों के अलावा एडहॉक, काॅन्ट्रैक्ट, वर्क चार्जडली वेजिज पर लगे कर्मचारियों को 6 महीने में हटाकर इनके स्थान पर नई भर्ती करने को कहा था। साथ ही फैसले में यह भी कहा गया था कि यदि सरकार इन कर्मचारियों को नहीं हटाती है तो वे स्वत: ही हटे हुए माने जाएंगे।

16 जून 2014 व 7 जुलाई 2014 को लाई गई पॉलिसी के अनुसार ग्रुप-बी और 18 जून 2014 व 7 जुलाई 2014 की पॉलिसी के अनुसार ग्रुप-सी व डी के पदों पर 4645 कर्मचारियों को पक्का किया था। 31 मई को हाईकोर्ट ने पॉलिसियों को रद्द कर नियमित किए कर्मचारियों को 6 माह में हटाने के आदेश दिए थे। इन नौकरियों को बैकडोर से फायदा पहुंचाना बताया गया था। 30 नवंबर को यह डेडलाइन पूरी हो रही थी।

सुप्रीम कोर्ट ने नौकरियों के मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। इससे कर्मचारियों को अब नहीं हटाया जाएगा। मामले की अब सुनवाई शुरू होगी-बलदेव राज महाजन, एडवोकेट जनरल।

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