मोतियों की माला से हिंद को घेरने की तैयारी में चीनी ड्रेगन- किताब में खुलासा

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Deepak Khokhar, Yuva Haryana
Rohtak, 30 July, 2018

हिंदुस्तान की बढ़ती सामरिक शक्तियों को देखते हुए चीनी ड्रेगन नजदीकी देशों में अपनी घुसपैठ बढ़ाने में तेजी से जुट गया है। भारत को थल, जल, हवा और मिसाइल से मात देने के लिए चीनी ड्रेगन ने देश के चारों ओर मोतियों की माला की तरह सामरिक ठिकाने बना लिए हैं। सामरिक अध्ययन की भाषा में इसे मोतियों की माला का नाम दिया गया है। स्पष्ट कहा जाए तो चीन ने भारत को चारों ओर से घेरने के लिए अपने सामरिक ठिकानों को मजबूत कर लिया हैं, जोकि देश की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। यह खुलासा किया है महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के सामरिक अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आरसी सिवाच ने अपनी किताब हिंद महासागर एवं भारत की सामुद्रिक सुरक्षा में। 
33 वर्ष के अपने सामरिक अध्ययन अनुभव और देशों की यात्राओं के जरिए प्रो. सिवाच ने इस चुनौती से बचने के उपाय भी किताब में दर्ज किए हैं, ताकि इन्हें अपनाकर भारत की सामुद्रिक शक्तियों में इजाफा हो सके। 
 
ये हैं चीन के सामुद्रिक अड्डे 
– पाकिस्तान में ग्वादार 
– श्रीलंका में हम्बनटोटा 
– मालदीव में माराओ 
– बांग्लादेश में चटगांव 
– म्यांमार में कोको द्वीप 
– कंबोडिया व थाईलैंड में तैयारी 
 इन ठिकानों में चीन की एयरबेस, सर्विलांस सिस्टम, बंदरगाह व हवाई पट्टी शामिल हैं। 
 
तेल ठिकाने पर कब्जे की योजना 
दक्षिण चीन सागर में स्पार्टली द्वीप को लेकर चीन का जापान और वियतनाम के साथ मलेशिया और इंडोनेशिया के साथ विवाद चल रहा है। 
भारत के अक्साईचिन और पाकिस्तान के पीओके के बीच कराकोरक सड़क मार्ग बना चुका है। इसी रास्ते से चीन और पाक के बीच द्विपक्षीय व्यापार होता है। 
 
कौन हैं प्रो. आरएस सिवाच 
प्रो. आरएस सिवाच एमडीयू के सामरिक अध्ययन विभाग के अध्यक्ष रहे हैं और उनके पिता कैप्टन गंगा बिशन और दो भाई हैं। एक भाई सूबे मेजर रत्न सिंह थल सेना में रहे और दूसरे भाई हेलीकॉप्टर इंजीनियरिंग से एचएस सिवाच वह शख्स हैं, जिन्होंने अंटार्टिका में भारत का पहला हाउस बेस कैंप दक्षिणी गंगोत्री बनाया। इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति अवार्ड भी मिला। उनके साथ मिलकर देश के सामरिक हालातों का खूब अध्ययन किया है और कई देशों की यात्राएं कर स्थिति को किताब के जरिए बताया है। 
 
ये दिए सुझाव भी 
– भारत की अब तक डिफेंस पॉलिसी नहीं है, जो बनानी जरूरी है। 
– डिफेंस बजट बढ़ाने की जरूरत है। 
– एनएसजी की तर्ज पर हर सेना दस्ते में विशेष फोर्स शामिल की जाए। 
– भविष्य के लिए स्ट्रांग स्ट्रेटिजिक मैरी टाइम पॉलिसी बनें। 
– सेटेलाइट व्यवस्था और मजबूत बनें। 
– मैरिन कमांडो का विस्तार हो। 
– अभी तक तीन एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, इन्हें बढ़ाकर 5 से 6 किया जाए, ताकि फाइटर प्लेन समुद्र से ही उड़ान भरें।

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