भाकियू ने बिजली निगम के सीएमडी को सौंपा ज्ञापन, ये हैं प्रमुख मांगें

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Yuva Haryana, Chandigarh

प्रदेशभर में लंबित पड़े हजारों ट्यूबवैल के बिजली कनेक्शनों को मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक जारी न करने सहित बिजली से संबंधित कई मांगों वाला ज्ञापन सौंप कर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने जल्द समाधान करवाएं जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया है। ज्ञापन में प्रमुख तौर पर प्रदेश के लाखों घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को दिल्ली सरकार की तर्ज पर पहली 300 यूनिट फ्री दिए जाने व मुख्यमंत्री मनोहर लाल व बिजली मंत्री रणजीत सिंह से सयुंक्त रूप से भाकियू के शिष्टमंडल से जल्द एक उच्च स्तरीय बैठक करवाएं जाने की मांग की गई है। ताकि समय पर समस्याओं का समाधान हो सके।

भाकियू के शिष्टमंडल ने बिजली निगम के सीएमडी शत्रुजीत कपूर को पंचकूला स्थित कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया। शिष्टमंडल की अगुवाई भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने की। निगम के सीएमडी कपूर ने सभी मांगों पर गंभीरता दिखाते हुए जल्द मुख्यमंत्री से वार्ता करवाएं जाने का शिष्टमंडल को आश्वासन दिया। किसान नेता रतनमान ने कहा कि चुनाव से पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दिसंबर 2019 तक के सभी लंबित ट्यूबवैल के बिजली कनेक्शनों को जारी करने की एक बड़ी घोषणा की थी। लेकिन किसानों की ओर से निगम में लाखों रूपए जमा करने के बाद करीब 85 हजार लंबित कनेक्शन जारी नही किए जा रहे है। किसान मारे मारे फिर रहे है। उनकी कहीं भी सुनवाई नही हो रही है। इसलिए भाकियू ने मुख्यमंत्री व बिजली मंत्री से बैठक करने की ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है।

भाकियू शिष्टमंडल में चीफ ऑग्रेनाईजर प्रताप सिंह माजरा, प्रदेश कार्यालय सचिव बलजीत सिंह राठी, अंबाला मंडल अध्यक्ष नरपत सिंह राणा, प्रवक्ता सुरेंद्र सागवान, जिला करनाल सरंक्षक महताब कादियान, पंचकूला जिला महासचिव सुशील राणा, जिला अंबाला प्रवक्ता विरेंद्र राणा शामिल थे।

ये है मांगे:-
1. यह कि प्रदेश सरकार ने सभी लंबित पड़े ट्यूबवैल के बिजली कनेक्शन देने घोषणा की थी। लंबित पड़े ट्यूबवैल के बिजली कनेक्शन की संख्या आज करीब 85000 है। इस बारे में स्थिति स्पष्ट न होंने की वजह से किसान मारे मारे फिर रहे है।
2. यह कि जो गत वर्ष बिल निपटान योजना जारी की गई थी। जिन उपभोक्ताओं के डिफालटर हो जाने की वजह से मीटर उतार लिए गए थे। बिल निपटान के बाद उनके घरों के बाहर मीटर लगाने की बात हुई थी। बिजली निगम की ओर से अभी तक मीटर नही लगाए गए है। बिजली के बिल एवरेज पद्वति के हिसाब से भेजे जा रहे है। जिसमें उपभोक्ता का कोई दोष नही है। जब तक मीटर नही लगाए जाते है, तो बिल निपटान पद्वति से 116 रूपए प्रति किलोवॉट की दर से बिल लिए जाए। नही तो डिफालटर उपभोक्ताओं की संख्या बड़ जाएगी।
3. यह कि जगमग योजना के तहत जो मीटर घरों के बाहर लगाए जा रहे है। उनकी बिलिंग ठीक से नही हो रही है। जिससे उपभोक्ताओं में संदेह पैदा हो रहा है कि ये मीटर ज्यादा तेज चलने वाले है। एकाऊंट सिस्टम में संबंधित कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाए।
4. यह कि कैथल, कुरूक्षेत्र, करनाल व रोहतक में कई वर्ष पूर्व लागू की गई अपना ट्रासफार्मर योजना में ट्रासफार्मर के चोरी हो जाने की एवज में किसान से 20 प्रतिशत कीमत लिए जाने की शर्त को खत्म किया जाए। इस संबंध में जो एचईआरसी में अपना ट्रासफार्मर योजना से संबंधित मामला विचाराधीन है उसका जल्द निपटान करवाया जाए।
5. प्रदेश के लाखों घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को दिल्ली सरकार की तर्ज पर पहली 300 यूनिट फ्री बिजली दी जाए।

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