हरियाणा में काला गेहूं की खेती शुरू, मधुमेह और कैंसर रोग का करेगी खात्मा

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Yuva Haryana

Sirsa, 11 April,2018

हरियाणा में काला गेहूं की खेती शुरू की गई है, जो कि मधुमह रोग और कैंसर पीड़ितों के लिए काफी राहत की खबर है।

पीड़ितों के लिए अच्छी खबर है क्योंकि काला गेहूं मधुमह रोग का अब खात्मा करेगी। इसके साथ ही कैंसर से पीड़ित लोगों के लिए भी ये मददगार साबित होगी।

हरियाणा में किसान अब पारंपरिक गेहूं के साथ ही काले गेहूं की खेती भी कर रहे हैं। कृषि विज्ञानियों के अनुसार इस गेहूं से बनी रोटी खाने से शुगर और कैंसर से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी।

बता दैं कि डबवाली क्षेत्र के किसानों ने पहली बार करीब 80 एकड़ में इस गेहूं की बिजाई की है।

काले गेहूं के बीज को तैयार करने में जामुन और ब्‍लू बेरी फल का इस्‍तेमाल होता है। इसकी खेती से उपज भी अधिक मिलेगी। इस गेहूं की खेती से प्रति एकड़ करीब 15 से 18 क्विंटल उपज मिलेगी।

काले गेहूं की रिसर्च साइंटिस्ट डा. मोनिका गर्ग ने बताया कि उन्होंने जापान में आठ वर्ष बिताकर काले गेहूं पर रिसर्च की है। उनके अनुसार, काले गेहूं का बीज तैयार करने में जामुन और ब्लू बेरी फल के मिश्रण का भी इस्‍तेमाल किया गया है। इसी कारण इसका रंग काला है और ये घातक हो रहे मधुमेह और कैंसर जैसे रोगों से लड़ने में बेहद सक्षम है।

कृषि विज्ञानी ने बताया कि काला गेहूं पौष्टिक तत्वों से भी भरपूर है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, जिंक, पोटाश, आयरन व फाइबर आदि तत्व पारंपरिक गेहूं के मुकाबले दोगुनी मात्रा में हैं।

इस गेहूं की रोटी खाने से शरीर का मोटापा भी कम होता है। साथ ही एसिडिटी से भी छुटकारा मिलता है।

ये गेहूं पकने में भी साधारण गेहूं जितना ही समय लेती है, लेकिन अगर इसकी बिजाई अगेती की जाए और पकने के समय 30- 35 डिग्री के बीच तापमान हो तो इसकी गुणवत्ता और रंग भी अच्छे बनते हैं।

 

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