दृष्टिहीनता को नहीं बनने दिया अपनी कमजोरी, अपने हुनर से पाल रहे हैं परि‍वार

Breaking कला-संस्कृति चर्चा में बड़ी ख़बरें हरियाणा हरियाणा विशेष

Yuva Haryana,

Karnal, 04 Feb,2019

न देख पाने की लाचारी के बावजूद इन दोनों ने परिस्थितियों के आगे कभी हार नहीं मानी। बात हो रही है हरियाणा के करनाल के रहने वाले सोहन लाल और बीजेंदर की। सोहन लाल और बीजेंदर के पास आंख से देखने की क्षमता तो नहीं है, लेकिन अपनी मन की आंख से लोगों को जरूर पहचान लेते हैं। न देख पाने की लाचारी के बावजूद दोनों ने परिस्थितियों के आगे कभी हार नहीं मानी।

सोहन और बिजेंदर रेड क्रॉस भवन में कुर्सियां बुनने का काम करते है। ये कुर्सियां प्लास्टिक की तारों से बुनाई जाती हैं और सरकारी मुख्यालयों-दफ्तरों में रखी जाती हैं। ये दोनों रोजाना एक-एक कुर्सी तैयार करते हैं, उसके बाद कुर्सियों को सरकारी मुख्यालयों तक पहुंचाया जाता है।

रोजाना सुबह 8 बजे दफ्तर पहुंचना और शाम 5 बजे तक काम करना, दोनों की जिंदगी का एक रूटीन है। दृष्टिहीन होने के बावजूद इन दोनों ने कभी जीवन में हार नहीं मानी। दोनों का मानना है कि अपनी कमजोरी से हारकर, मुंह छिपाकर रोने की बजाय मेहनत से काम करना चाहिए।

एक दुसरे के सहारे चलना और  बात करते हुए सोहन लाल और बीजेंदर का काम कब खत्म हो जाता है, इन्हें खुद भी पता नहीं लगता। पिछले कई सालों से इनका जीवन इसी तरह चल रहा है।

बीजेंदर वसंत विहार में रहता है, पत्नी भी बदकिस्मती से कुछ देख नहीं सकती। इसके बावजूद भी दोनों अपने बच्चों को पढ़ा लिखा रहे हैं, ताकि वे बड़े होकर सफल नागरिक बन सकें। सोहन की पत्नी भी दिव्यांग है। सोहन दो बच्चों का पिता है। सोहन भी अपने बच्चों को पढ़ाने में जुटा है ताकि उनका भविष्य उज्वल रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *