गोबर से बन रही है रेडिएशन से बचाव वाली ईंट, प्लास्टर, टाइल और सीलन की समस्या का भी होगा समाधान

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Yuva Haryana

Ambala, 29, Jan, 2019

गोबर का सबसे लाभप्रद उपयोग खाद के रूप में होता है, भारत में जलाने की लकड़ियों का अभाव होने से इसका अधिक उपयोग ईंधन के रूप में ही होता है। लेकिन गोबर का और क्या उपयोग हो सकता है इसका उदाहरण अंबाला की 35 वर्षीय वाणी गोयल ने दिया।

बता दें कि वाणी गोयल ने गोबर से ईंटो और प्लास्टर का निर्माण किया है। हरियाणा से लेकर राजस्थान तक इस पहल का विस्तार तेजी से हो रहा है।

सौकड़ो घरों में गौबर से बनी ईटों और प्लास्टर का इस्तमाल हो चुका है, जिनके परिणाम भी अच्छे आए है।

गोबर से तैयार प्लास्टर को सरकारी लैब मे जांचा परखा जा चुका है। जबकि ईंट की मान्यता मिलनी शेष है। ईंट और प्लास्टर के अलावा जलवान और मोबाइल स्टैंड जैसी ईको फ्रेंडली वस्तुए भी तैयार की गई है।अब तक प्लास्टर को वैदिक प्लास्टर के नाम से बेचा जा रहा है, लेकिन अब उसका नाम गऊ क्रीट होगा।

इन सब चीजों के निर्माण में वाणी का साथ रोहतक के डॉ. शिवदर्शन मलिक ने भी दिया। उन्होंने  बताया कि इस प्लास्टर से घरों की सीलन भरी दीवोरों की समस्या से छुटकारा मिलेगा।  देसी गाय और बैलों की नसल को बचाने के लिए यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। वैदिक प्लास्टर को केंद्र सरकार, औखला, उप्र स्थित लैब से मंजूरी भी मिल चुकी है।

डॉ. शिवदर्शन और वाणी गोयल का दावा है कि इन ईंटों और प्लास्टर से रेडिएशन की समस्या खत्म होगी। मोबाइल की तरंगे हानिकारक होती हैं। गोबर की ईंट-दीवार-प्लास्टर आदि से रेडिएशन का कुप्रभाव घटेगा। मोबाइल स्टैंड भी इसमें कारगर साबित होगा।

 

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