18 साल से बिछड़े मुस्लिम भाई-बहन को मिलाया, एक हिंदू ने पेश की मिशाल

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Bhagat Tewtia, Yuva Haryana
Palwal, 15 Dec, 2018

जहां एक ओर कुछ लोग धर्म व जाति के नाम पर समाज को तोडऩे की कोशिश में लगे रहते हैं वही कुछ लोग इससे ऊपर उठकर समाज के लिए मिसाल बन जाते हैं । ऐसा ही एक उदाहरण ग्राम दुर्गापुर निवासी प्रेमचंद भारद्वाज ने  पेश किया  हैं। जिन्होंने ना केवल 18 सालों से सडक़ों पर घूम रहे एक युवक को नल्लड मेडिकल कॉलेज में ले जाकर मनोचिकित्सक से दिखा कर उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल उसकी देखभाल कर उसके परिजनों को सौंप दिया ।

आज सदर थाना में 18 साल पहले अपने भाई तुफैल अंसारी से बिछुडी बहन रूखसाना मिली तो आंखों से खुशी के अंासू छलक पडे।   भाई-बहन के मिलन को देखकर हर कोई प्रेमचंद भारद्वाज की दिल से प्रशंसा के किये बगैर नहीं रहा। 18 साल पहले लापता हुए तुफैल अंसारी सदर पुलिस थाने में अपनी बहन रूखसाना और भतीजा आरिफ से मिला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हसनखान मेवाती मेडिकल कालेज नूंह के ब्लैड बैंक में सीनियर टेक्नीसियन के पद पर कार्यरत गांव दुर्गापुर निवासी पंडित प्रेमचंद को गांव महेशपुर और मंडौरी के बीच में एक युवक को बैठे देखा। बढे हुए बाल, मानसिक तौर पर विक्षप्ति, शरीर से आती दुर्गंध और दुबले-पतले जिस युवक को छूना तो दूर कोई नजदीक से भी निकलता उसे पंडित प्रेमचंद बाइक पर बैठाकर घर लाया। घर पर खाना खिलाया, बाल कटवाएं, कपडे बदलवाए और मेडिकल कालेज के मनोवैज्ञानिक डाक्टर निखिल से चैक करवाया। डाक्टर निखिल ने बताया की युवक दिमागी तौर पर विक्षप्ति नहीं है केवल मानसिक तौर पर परेशान है। तुफैल ने बताया की वह यूपी के जिला आजमगढ की तहसील बुढैनपुर के गांव अतरौलिया का हूं। पंडित प्रेमचंद ने आजमगढ के गांव और थाना अतरौलिया के सब इंस्पेक्टर राकेश कुमार से बात की। सब इंस्पेक्टर राकेश कुमार ने बताया कि गांव अतरौलिया से 18 साल पहले मकबूर अंसारी का छोटा बेटा तुफैल अंसारी अपनी बहन रूखसाना के पास मोटर साईकिल रिपेयरिंग का काम सिखने दिल्ली के उत्तम नगर गया था और वहां से लापता हो गया। सब इंस्पेक्टर राकेश कुमार ने तुफैल के भाई शकील अहमद, मोहमद हारूण और जुबैर से बात करवाई। एक दूसरे के फोटो दिखाए तो एक बार पहचानने से इंकार कर दिया, लेकिन तुफैल ने जब अपने पिता का नाम मकबूल बताया तो उन्हें विश्वास हुआ की वह हमारा भाई है। शनिवार को सदर पुलिस थाने में एएसआई रामकरण की मौजूदगी में पंडित प्रेमचंद ने तुफैल अंसारी को उसके बहन रूखसाना, भतीजा आरिफ और भांजा शाह आलम को सौंपा।

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