सरकार ने 300 करोड़ के दवा खरीद घोटाले की जांच CAG को सौंपी

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Yuva Haryana

Chandigarh, (20 March 2018)

सांसद दुष्यंत के द्वारा लगाए गए पांच जिलों में सरकारी अस्पतालों के लिए दवा खरीद में घोटाले के आरोपों पर प्रदेश सरकार हरकत में आई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से पूरा ब्योरा तलब किया है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री ने हाई लेवल बैठक के बाद सभी जिलों में दवा खरीद की जांच नियंत्रक एवं लेखा परीक्षक (CAG) को दे दी है। साथ ही बगैर लाइसेंस के दवा बनाने वाली कंपनियों की जांच का जिम्मा ड्रग कंट्रोलर को दिया गया है।

बता दें कि इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला ने फतेहाबाद, हिसार, जींद, रेवाड़ी और रोहतक जिलों में दवाइयों और जांच उपकरणों की खरीद में 125 करोड़ रुपये की अनियमितताओं के दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। साथ ही पूरे प्रदेश में दवा खरीद में करीब 300 करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका जताई थी।

मामले में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप करने के बाद स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने विभाग के प्रधान सचिव अमित झा, स्वास्थ्य महानिदेशक सतीश अग्रवाल और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक पी अमनीत कौर को तीन वर्षों के दौरान हुई खरीद के रिकॉर्ड के साथ तलब किया है।

उच्चस्तरीय बैठक में अफसरों ने सभी जिलों में खरीद का पूरा रिकॉर्ड मंत्री की टेबल पर रखते हुए घोटाले के आरोपों को खारिज कर दिया। बाद में मंत्री ने भी अपनी बात को साबित करने के लिए आंकड़े पेश किए।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सांसद दुष्यंत चौटाला 300 करोड़ के घोटाले की बात कर रहे हैं, जबकि बीते तीन सालों में दवा और जांच उपकरणों की खरीद के लिए कुल 87.60 करोड़ रुपये ही जारी किए गए है। इसमें भी केवल 40.89 करोड़ रुपये का सामान खरीदा गया है।

विज के अनुसार मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत तीन साल में दवा खरीद के लिए कुल 75 करोड़ रुपये मंजूर हुए जिसमें से करीब 33 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसी तरह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत दवा खरीद के लिए मंजूर 12.60 करोड़ में से 7.86 करोड़ का ही इस्तेमाल हुआ।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आरोपों की विभागीय जांच कराते तो फिर से आरोप लगते। इसलिए ऑडिटर जनरल को जांच के लिए लिखा है। हिसार की शगुन ट्रेडिंग कंपनी और जीके ट्रेडिंग कंपनी के ड्रग लाइसेंस की जांच के लिए ड्रग कंट्रोलर को तुरंत प्रभाव से टीमें भेजी गई हैं। आरोप हैं कि दोनों कंपनियों के पास ड्रग लाइसेंस नहीं है। विज ने रोहतक में हेपेटाइटिस-बी की दवा खरीद के कागज दिखाते हुए कहा कि इसमें कमेटी के जरिये यह खरीद हुई और टेंडर पर सभी सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। टेंडर पर दिन और समय भी है जो 14 जनवरी 2016 को शाम चार बजे फाइनल हुआ।

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