बजट समझ नहीं आता हुड्डा को, हिम्मत है तो खुले मंच पर आकर बहस करें -कैप्टन अभिमन्यु

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Chandigarh, 31 March 2018

वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को न तो राज्य के आर्थिक आंकड़ों की समझ है और न ही बजट की। उन्हें सिर्फ जमीन से संबंधित घोटालों और भ्रष्टाचार की समझ थी और अपने दस वर्ष के शासन में उन्होंने यही किया।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक दिन पहले रोहतक में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार की वित्तिय स्थिति पर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि मौजूदा सरकार ने प्रदेश को कर्ज में डूबो दिया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जिस तरह से बजट पर बयान दे रहे हैं उससे उनकी समझ पर तरस आता है। कैप्टन अभिमन्यु ने बजट के मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा को किसी भी सार्वजनिक मंच पर आकर उनसे बहस की चुनौती देते हुए कहा कि बजट एक गम्भीर विषय है और वे विपक्ष से बजट पर ईमानदार आलोचना व सुझावों की भी अपेक्षा करते हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार पहली सरकारों के मुकाबले सस्ती दरों पर कर्ज लेकर पूर्व सरकार द्वारा आर्थिक विकास के रास्ते में खोदे गए गड्ढों को भरने का काम कर रही है।

कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि हरियाणा का बजट प्रबन्धन संतुलित है और राज्य की पहचान एक जिम्मेवार राज्य के रूप में हुई है तथा राष्ट्रीय स्तर पर भी राज्य के वित्त प्रबंधन की सराहना हुई है। सरकार ने चार साल के कार्यकाल में प्रस्तावित बजट अनुमानों का हर वर्ष 90 प्रतिशत वास्तविक खर्च किया है, जबकि पिछली सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2010-11 से वर्ष 2014-15 तक यह खर्च 85 प्रतिशत तक भी नहीं था।

उन्होंने कहा कि ऋण वृद्धि दर वर्ष 2011-12 में 19.41 प्रतिशत, वर्ष 2012-13 में 22.37 प्रतिशत और वर्ष 2013-14 में 19.02 प्रतिशत थी, जबकि वर्ष 2016-17 में ऋण वृद्धि दर को कम करके 16.87 प्रतिशत लाया गया तथा वर्ष 2017-18 में यह 17.42 प्रतिशत रही, जबकि वर्ष 2018-19 में ऋण वृद्धि दर 16.72 प्रतिशत प्रस्तावित है।

वित्त मंत्री ने कहा कि कर्मचारियों के वेतनमान व पेंशन पर वर्ष 2013-14 में 15,461 करोड़ रुपये जबकि वर्ष 2017-18 में 26,732 करोड़ रुपये खर्च हुए तथा वर्ष 2018-19 में कर्मचारियों के वेतनमान व पेंशन पर 28,898 करोड़ रुपये खर्च होना प्रस्तावित है।

खेती पर हुड्डा के 10 साल के बराबर हमारे 4 साल -अभिमन्यु

कैप्टन ने कहा कि कांग्रेस के 10 वर्षों के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र पर लगभग 11 हजार करोड़ रुपये खर्च किये गए थे परन्तु हमारी सरकार ने चार वर्ष में ही अर्थात 31 मार्च, 2018 तक कृषि व सम्बद्ध क्षेत्र पर 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है।

वित्त मंत्री ने कहा कि जो लोग विकास की अर्थव्यवस्था को समझते हैं, उन्हें कर्ज लेने का उद्देश्य पता है। हमारी सरकार पूर्व की सरकारों की तरह मौज-मस्ती के लिए, कर्मचारियों को वेतन देने के लिए या कर्ज व ब्याज की अदायगी के लिए कर्ज नहीं ले रही है। राज्य ने जो कर्ज लिया है वह पूंजीगत और ढांचागत विकास पर खर्च होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में कांग्रेस सरकार वेतन देने के लिए भी कर्ज ले रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य में राजस्व घाटा पिछले वर्षों के मुकाबले कम हुआ है और राजकोषीय घाटे में भी कमी आई है। सरकार की राजस्व घाटा शून्य पर लाने की योजना है।

 

बिजली कंपनियों का कर्ज सरकार के खाते में लेकर हर साल 1000 करोड़ बचा रहे हैं -कैप्टन

उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में कांग्रेस हरियाणा के ऊपर करीब एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गई थी जिसमें करीब 30 हजार करोड़ रुपये का कर्ज बिजली कम्पनियों पर था। इस कर्ज में से करीब 26 हज़ार करोड़ का कर्ज सरकार ने अपने खाते में ले लिया जिससे कर्ज के ब्याज पर बचत हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछले दस साल में कांग्रेस सरकार के समय का भी कर्ज हम चुका रहे हैं।

 

आरोपों की सच्चाई जाननी है तो खुले मंच पर आकर बहस करें हुड्डा -अभिमन्यु

कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा अगर बजट पर बहस करना चाहते हैं तो वे बयानबाजी न करें बल्कि किसी सार्वजनिक मंच पर आयें और तब बात करें ताकि हरियाणा की जनता को भी पता चले की वे बजट को लेकर जो आरोप लगा रहे हैं उनमें कितनी सच्चाई है। वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री को पहले भी विनम्रतापूर्वक सार्वजनिक तौर पर बहस की चुनौती दी थी जिसे उन्होंने आज तक स्वीकार नहीं किया और अब भी अपनी आदत के अनुसार झूठे आरोप लगा रहे हैं।

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